संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। कस्टमर केयर धोखाधड़ी का पर्याय साबित होता जा रहा है। गूगल पर कस्टमर केयर का नंबर सर्च करना लोगों को भारी पड़ रहा है। जालसाज भी कस्टमर केयर के नाम से फोन पर ठगी कर रहे हैं। इसी तरह सेक्टर-19 निवासी व्यक्ति से 9.50 लाख रुपये ठगने का मामला सामने आया है। पीड़ित ने ऑनलाइन बैंक का नंबर सर्च किया था। इसके बाद ठगी का शिकार हो गया।
पुलिस के अनुसार, सेक्टर-19 निवासी ब्रजमोहन ने शिकायत में बताया कि उनका अकाउंट सेक्टर-10 स्थित एसबीआई ब्रांच में है। 30 अक्टूबर की सुबह करीब साढ़े 10 बजे उनके रिश्तेदार ने देहरादून के बैंक में चेक लगाया था। चेक किसी कारणवश क्लियर नहीं हो पाया। उस चेक को क्लियर करवाने के संबंध में शिकायतकर्ता ने गूगल पर बैंक का नंबर सर्च किया। उन्हें एक नंबर मिला और शिकायतकर्ता ने उस नंबर पर फोन किया। एक मिनट बात करने के बाद आरोपी ने दूसरा नंबर दे दिया। आरोपी ने शिकायतकर्ता को चेक क्लियर करवाने का झांसा देकर बैंक से संबंधित सारी डिटेल्स जैसे डेबिट कार्ड, एक्सपायरी डेट आदि मांग कर अकाउंट से करीब 9.50 लाख रुपये निकाल लिए। इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाइ। अक्तूबर में इस तरह की यह तीसरी धोखाधड़ी हुई।
सेवानिवृत्त एसडीओ से 4.32 लाख रुपये ठगे
10 अक्टूबर को साइबर पुलिस ने सेवानिवृत्त एसडीओ से क्रेडिट कार्ड अपडेट करने का झांसा देकर 4.32 लाख रुपये ठगे। पीड़ित की शिकायत पर साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया था।
पैन कार्ड अपडेट करने का झांसा देकर 95 हजार ठगे
7 अक्तूबर को पैन कार्ड अपडेट करवाने का झांसा देकर सेक्टर-21 निवासी एक युवती से 95500 रुपये ठगने का मामला सामने आया। युवती की शिकायत पर साइबर पुलिस ने मामला दर्ज किया।
- कस्टमर केयर नंबर के फ्राड से कैसे बचें
1. साइबर थाना एसएचओ हरविंद्र सिंह ने बताया कि ऑनलाइन प्लेटफार्म का इस्तेमाल करते समय सतर्कता बेहद जरूरी है। जल्दबाजी में किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करें।
- गूगल पर कस्टमर केयर नंबर सर्च करने से बेहतर है कि आप कंपनी के बुकलेट, पंपलेट या अधिकारिक वेबसाइट पर दिए नंबर पर ही संपर्क करें। ऐसे में फ्रॉड होने की संभावना नहीं होगी।
- बैंक के कस्टमर केयर का नंबर पासबुक, चेकबुक या डेबिट-क्रेडिट कार्ड के पीछे भी लिखा होता है।
- कैशबैक, इंस्टेंट रिवॉर्ड या डिस्काउंट का झांसा देकर फोन नंबर, अकाउंट नंबर या आधार जैसी पर्सनल जानकारियों को मांगने वाले पोर्टल या मोबाइल एप से दूरी बनाएं।
- अगर आपको लगता है कि कोई ट्रांजेक्शन आपने नहीं की है, तो उसकी शिकायत नेशनल साइबर क्राइम के हेल्पलाइन-1930 पर तुरंत दें।