चंडीगढ़। चैत्र नवरात्र पर इस वर्ष सर्वार्थ सिद्धि महायोग मन रहा है। इसी महायोग में नवरात्र में मां धरती पर आ रही हैं। माता की विदाई हाथी पर है। मां सभी की विघ्नों को दूर करते हुए विदा होगी। यह कहना है सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख और कर्मकांडी पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र का। उन्होंने कहा कि नवरात्र 9 अप्रैल से शुरू हो रहा है। 8 अप्रैल को रात 11.15 बजे पर प्रतिपदा शुरू होगा और 9 की रात 8.31 बजे तक रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग 9 अप्रैल को सुबह 7.33 बजे से शुरू होगा जो 10 अप्रैल सुबह 5.06 बजे समाप्त होगा। सर्वार्थ सिद्धि योग में उदयकालीन नवरात्र आ जाए तो सर्वार्थ सिद्धि महायोग बनता है। इस महा सर्वार्थसिद्धि महायोग में माता के आगमन से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। इस वर्ष मां घोड़ी पर सवार होकर आ रही हैं। इसके कारण राजनीतिक और सामाजिक अव्यवस्था होगी। लेकिन मां की विदाई हाथी की सवारी से है। हाथी गणेश का रूप हैं। यह किसानों और व्यापारियों सहित सभी कि लिए शुभ रहेगा। नवरात्र 9 अप्रैल को सुर्योदय सुबह 6.06 बजे होगा। इसलिए नवरात्र में मेष लग्न, मीन राशि और रेवती नक्षत्र में हो रहा है। यह चंडीगढ़ के लिए शुभ रहेगा।
मीन राशि में प्रात:काल प्रतिपदा का प्रारंभ है। चंडीगढ़ की भी मीन राशि है। मीन राशि का स्वामी बृहस्पति हैं। यह बहुत ही शुभ रहेगा। लग्न मेष है। मेष का स्वामी ग्रहों के सेनापति मंगल है। ऐसे में शहर की सुरक्षा बेहतर रहेगी। दुश्मनों की ताकत कम होगी। मेष का स्वामी मंगल 11वें स्थान पर शनि के साथ हैं। इसलिए बीमार व्यक्तियों को बीमारी से छुटकारा मिलेगा। विद्या के लिए बेहतर मौका है।
घट स्थापना के शुभ मुहूर्त...
सुबह 6.06 से 6.51 बजे तक सबसे शुभ मुहूर्त है। यह प्रात:कालीन संध्या का समय है।
दूसरा अभिजीत मुहूर्त है। यह सुबह 11.30 से लेकर 12. 40 बजे तक है। इसके बाद मध्यम है।
ऐसे करें पूजा
देवालय पूजक परिषद के अध्यक्ष और सेक्टर- 18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी पंडित डॉ लाल बहादुर दुबे ने बताया कि सुबह स्नान आदि से निवृत होकर गौरी गणेश की पूजा करें। उसके बाद घट स्थापना करें। सबसे पहले जौ बीजे। उस पर मिटटी या तांबे का कलश रखकर पांच पल्लव रखें। उसके बाद नारियल रखें। कलश में गंगाजल डालें। पंचोपचार से पूजा के बाद भगवान पर नैवैद्य चढ़ाएं। नवग्रहों के पूजन के बाद माता का पूजन शुरू करना चाहिए। माता मुख्य हैं इसलिए उनकी पूजा बाद में होती है।
कन्या पूजन से पूर्ण होता है मां का पूजन
सेक्टर-30 के शिव शक्ति मंदिर के पुजारी पंडित श्याम सुंदर शास्त्री ने बताया कि माता की मूर्ति रखकर आवाहन करना चाहिए। उसके बाद प्रतिष्ठा करनी चाहिए। गुलाब का फूल का आसन देना चाहिए। माता का पूजन के बाद आरती करनी चाहिए। उसके बाद कन्या पूजन करें। कन्या को भोजन कराएं। कन्या पूजन से मां का पूजन पूर्ण होता है।