चंडीगढ़। नशा तस्करी के मामले में पुलिस अधिकारियों के गवाही पर पेश न होने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए उनका वेतन रोकने का आदेश जारी किया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि उनका वेतन तब तक जारी न किया जाए जब तक वे गवाही के लिए पेश न हों।
याचिका दाखिल करते हुए लुधियाना निवासी राजिंदर सिंह ने एनडीपीएस के मामले में नियमित जमानत की मांग की थी। गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने नाका लगाया था और इस दौरान चूरा पोस्त की बड़ी खेप मिलने पर दिसंबर 2021 में एनडीपीएस का मामला दर्ज किया था। इसी मामले में याचिकाकर्ता को गिरफ्तार किया था।
याची ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद लंबे ट्रायल के बावजूद गवाहों की पेशी नहीं हो सकी। इस मामले में कुल 15 गवाह थे और अभी तक केवल एक गवाही ही हो सकी है। ऐसे में याचिकाकर्ता को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित होना पड़ रहा है। इस केस में अधिकतर गवाह पुलिस अधिकारी हैं और समन आदेश के बावजूद वे पेश नहीं हो रहे हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में अभियोजन की अक्षमता व ट्रायल अदालत की लाचारी का कोई स्पष्टीकरण नहीं है। ऐसे में अब इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश के बावजूद पेश न होने वाले पुलिस अधिकारियों का वेतन रोकने का आदेश जारी किया है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि उनका वेतन तब तक जारी न किया जाए जब तक वे कोर्ट में आकर गवाही नहीं दे देते।