चंडीगढ़। हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले सफाई कर्मचारियों ने सामाजिक सुरक्षा लाभ की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है।
याचिका दाखिल करते हुए शशिपाल व अन्य ने हाईकोर्ट के समक्ष पक्ष रखा। याची ने कहा कि हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले 10 वर्ष से भी अधिक समय से मासिक भुगतान सफाई कर्मचारी के तौर पर याचिकाकर्ता कार्य कर रहे हैं। हरियाणा सरकार अपने आधीन कच्चे कर्मियों को पक्का करने के लिए 2014 में नीति लेकर आई थी। इस नीति को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई तो हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ हरियाणा सरकार अपील में सुप्रीम कोर्ट चली गई थी और सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी। याची ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की रोक के चलते यह नीति अभी भी प्रभावी है और इसी आधार पर सरकार ने उन कर्मचारियों को पक्का किया था जिन्होंने 2014 में तीन या अधिक वर्ष की सेवा पूरी कर ली हो।
याची ने कहा कि सभी कच्चे कर्मियों को नीति का लाभ दिया गया, लेकिन याचिकाकर्ताओं को इससे वंचित रखा गया। प्रदेश में हजारों की संख्या में ऐसे सफाईकर्मी सालों-साल से कार्य कर रहे हैं। सुनवाई के दौरान याची पक्ष ने सामाजिक सुरक्षा लाभ से याचिकाकर्ताओं को वंचित रखने को भी चुनौती दी है। याची ने कहा कि प्रदेश में अन्य कर्मियों को ईपीएफ, बोनस, ग्रेच्युटी व बीमा जैसे लाभ सरकार की ओर से दिए जाते हैं लेकिन सफाई कर्मियों को इससे वंचित रखा गया है। सेवाएं नियमित करने का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, लेकिन सामाजिक सुरक्षा लाभ जारी करने पर कोई पाबंदी नहीं है। सफाई कर्मी लंबे समय से मासिक वेतन आधार पर कार्य कर रहे है ऐसे में उन्हें इन लाभ से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद याचिका पर हरियाणा सरकार व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।