चंडीगढ़वासियों को अब अपने किसी भी काम के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। आवेदन करने के बाद उस काम को तय समय में पूरा करना अब विभाग व अधिकारी की जिम्मेदारी है। इसमें फेल होने पर सुपरिंटेंडेंट व उच्च अधिकारियों पर गाज गिरेगी।
यूटी प्रशासन ने प्रशासक वीपी सिंह बदनौर की मंजूरी के बाद राइट टू सर्विस रूल्स को नोटिफाई कर दिया है। राइट टू सर्विस एक्ट को चंडीगढ़ प्रशासन ने काफी पहले ही लागू कर दिया था लेकिन रूल्स नोटिफाई नहीं हुए थे, जिसकी वजह से इस एक्ट का पालन कैसे होगी यह साफ नहीं था।
रूल्स लागू होने के बाद अब चंडीगढ़ प्रशासन के विभिन्न विभागों की कुल 188 सर्विस को अब इस एक्ट के तहत तय समय के अंदर पूरा करना होगा। एक्ट के अंदर आने वाले 188 सर्विस के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो गई है। इसमें सर्विस की समय सीमा ही नहीं, उस सर्विस से जुड़े डेजिग्नेटेड अधिकारी, फर्स्ट अपीलेंट अथॉरिटी और सेकेंड अपीलेंट अथॉरिटी भी तय कर दी गई है।
अब अगर काम समय पर नहीं होता तो इन अथॉरिटी को शिकायत की जा सकती है। साथ ही काम में देरी करने वाले अधिकारी पर कार्रवाई भी होगी। यूटी प्रशासन ने दो साल पहले राइट टू सर्विस कमीशन बनाया था। सेक्टर-18 में इस कमीशन का ऑफिस है और रिटायर्ड आईएएस केके जिंदल को इस कमीशन का चेयरमैन बनाया गया हैं।