27 मार्च से पहले फैसला चाहती है याचिका पक्ष, प्रशासन ने शुरू की वार्ड-वार मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। पंचकूला नगर निगम की वार्डबंदी को लेकर राजनीतिक और कानूनी गतिविधियां तेज हो गई हैं। 11 मार्च को प्रस्तावित सुनवाई से पहले याचिकाकर्ता पक्ष अगले सप्ताह पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में लंबित रिट याचिका पर शीघ्र सुनवाई के लिए आवेदन दायर करेगा।
जिला प्रशासन ने वार्ड-वार मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और 27 मार्च तक इसे अंतिम रूप देने की तैयारी है। याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि यदि मतदाता सूची प्रकाशित हो जाती है तो बाद में राहत मिलना कठिन हो जाएगा। ऐसे में या तो याचिका की सुनवाई अग्रिम कर शीघ्र की जाए या वार्ड-वार मतदाता सूची जारी करने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। अधिवक्ता रविंदर रावल ने बताया कि नगर निगम चुनाव की संभावित घोषणा को देखते हुए अदालत से त्वरित हस्तक्षेप की मांग की जा रही है।
क्या है मामला
यह याचिका कांग्रेस की पूर्व पार्षद उषा रानी व अन्य की ओर से दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है that नई वार्डबंदी में अनुसूचित जाति के वार्डों की संख्या घटा दी गई है। दिसंबर 2020 के चुनाव में अनुसूचित जाति के दो वार्ड थे, जबकि नई वार्डबंदी में इसे घटाकर एक कर दिया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में आबादी बढ़ी है, ऐसे में वार्डों की संख्या कम करना संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है और सामाजिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित करता है।
चुनाव को लेकर आरोप-प्रत्यारोप
इंडियन नेशनल लोकदल के जिलाध्यक्ष पंचकूला शहरी एवं प्रदेश कोषाध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने आरोप लगाया कि नगर निगम चुनाव जानबूझकर टालने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि अन्य राज्यों में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर स्थानीय निकाय चुनावों को मई-जून तक टालने की रणनीति बनाई जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मतदाता सूची कार्यकाल समाप्त होने से पहले भी अधिसूचित की जा सकती थी।