पंचकूला। श्री रघुनाथ मंदिर सेक्टर-15 के वार्षिक स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन पंडित यशोदा नंद शास्त्री ने परम बैरागी श्री सुखदेव जी महाराज और परीक्षित जी के संवाद के बारे में बताया कि परीक्षित का प्रश्न था कि जल्दी मरने वाले को क्या करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जाना तो सबको पड़ता है मृत्यु सब की होती है। लेकिन मृत्यु सरल कैसे हो और अंत में उसे परमात्मा से साक्षात्कार कैसे हो। इसके लिए साधन बताया। साधन क्या है, प्रथम (श्रोत्तव्य) भगवान के पवित्र चरित्र को सुनो। दूसरा साधन भगवान की महिमा को दूसरों को सुनाएं। तीसरा साधन लगातार समाधि लगाकर इस प्रभु के सब स्मरण में चिंतन करो, यह तीन कार्य जब तक नहीं करेंगे तब तक इस भवसागर से मुक्ति संभव नहीं है। इस कार्य के अपने कल्याण के लिए हमें परमात्मा का ध्यान सदैव करना चाहिए। चाहे सुख हो चाहे दुख हो हर परिस्थिति में उसको याद रखना चाहिए। वह परमात्मा हमसे कभी दूर नहीं होंगे सदैव हमारे कष्टों का निवारण करते रहेंगे। आज की कथा में विभिन्न सेक्टरों से बहुत अधिक संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस पवित्र अवसर पर मंदिर सभा के सभी सदस्य श्यामलाल बंसल, राजेंद्र शर्मा, दौलत राम राणा, कीरत सिंह रावत औ हरेंद्र शर्मा उपस्थित थे।