संवाद न्यूज एजेंसी
रायपुररानी। करोड़ों की लागत से बनाए तहसील कार्यालय की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि अब यह चिंता का विषय बन गया है। करोड़ों रुपये की लागत से बनाए इस भवन की स्थिति आज बेहद दयनीय है। यहां सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। स्थानीय प्रशासन इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। सरकारी भवनों और संस्थानों का उद्देश्य जनता को बेहतर सेवाएं प्रदान करना होता है, लेकिन यहां मामला बिल्कुल विपरीत है। इस भवन में फैली गंदगी और प्रशासनिक अनदेखी से आम जनता के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। तहसील कार्यालय के भीतर स्थित पुरुष और महिला शौचालय गंदे पड़े हैं। दूर-दराज से आने वाले बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है।
बुनियादी सुविधाओं की कमी
तहसील कार्यालय में पीने के पानी की भी समुचित व्यवस्था नहीं है। एकमात्र वॉटर कूलर जो यहां लगा हुआ है, वह भी धूल और जालों से ढका हुआ है। इससे लोग पानी पीने में हिचकिचाते हैं। वॉटर प्यूरीफायर का कोई इंतजाम नहीं है, जो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। ऐसे में दूर-दराज से आने वाले लोगों को अपनी प्यास बुझाने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है।
बिजली की समस्या और प्रशासनिक उदासीनता
बिजली की उपलब्धता भी एक बड़ी समस्या है। भवन में लगाए सोलर पैनल कभी इस्तेमाल में नहीं लाए गए। इससे सौर ऊर्जा का उपयोग नहीं हो पा रहा है। बिजली की नियमित आपूर्ति के लिए जनरेटर भी लगाया गया है, लेकिन वह भी कभी चालू नहीं किया गया। इस कारण लोगों को बिजली की समस्या का सामना करना पड़ता है। इससे उनके कामकाज में बाधा उत्पन्न होती है। यहां तक की करोड़ों की लागत से बना यह भवन अब खंडहर जैसा दिखने लगा है। प्रशासन की लगातार अनदेखी ने इस महत्वपूर्ण सरकारी भवन को अव्यवस्थित और असुरक्षित बना दिया है। स्थानीय लोग प्रशासन से बार-बार इस मुद्दे पर ध्यान देने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाजें अनसुनी हो रही हैं।
तहसील में मेरी नियुक्ति के बाद से ही खामियों को दूर किया जा रहा है। अपने स्तर पर खामियां दूर की जा रहीं हैं। अन्य समस्याओं को लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया गया है। - विक्रम सिंगला, तहसीलदार रायपुररानी