पंचकूला। शहर में सोमवार को हुई तेज बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रशासन की बदइंतजामी से सेक्टर-20 की अनाज मंडी में बेचने के लिए लाया गया किसानों का धान भीग गया। वहीं, एजेंसियों की ओर से खरीदा गया धान भी बरसात की वजह से गीला हो गया है। धान भीगने से मंडी में आए किसानों की उचित दाम मिलने की उम्मीद टूट गई है। किसानों ने मंडी की अव्यवस्था और नाकाफी इंतजामों की लापरवाही पर सरकार के प्रति नाराजगी जताई है।
किसान हरपाल सिंह ने कहा कि रविवार को सुखाने के लिए धान को मंडी एरिया में फैलाया था, सोमवार सुबह अचानक बारिश शुरू हो गई। जैसे तैसे फैलाई धान को इकट्ठा किया। उन्होंने बताया कि मार्केट कमेटी से धान की ढेरी ढकने के लिए कुछ नहीं मिला है। खुद की तिरपाल की व्यवस्था कर धान की ढेरियों को ढका है। मंडी में करीब 20 से अधिक ट्रैक्टर ट्रॉली धान से भरे खड़े हैं।
क्या कहते हैं किसान
मेहनत बारिश में भीग गई
उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले का रहने वाला हूं। जीरकपुर में 7 किले जमीन किराए पर लेकर धान की फसल की थी। तीन से चार महीने कमर तोड़ मेहनत की है। यहां धान लाने के बाद हिम्मत हार गया हूं। खुले आसमान के नीचे बारिश में पांच महीने की मेहनत भीग गई है। मंडी में धान को सुरक्षित बचाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। - मंगली सिंह
गीला धान खरीदने के लिए कोई राजी नहीं चार बीघा धान लगाए थे। दो दिन पहले धान सेक्टर-20 अनाज मंडी में लेकर आया हूं। धान में नमी ज्यादा होने से दो दिन से कोई खरीदार लेने को ही राजी नहीं है। रविवार को धान की ढेरी को सुखाने के लिए फैलाया था कि कुछ रेट मिल जाएगा। अब उम्मीदों पर बारिश ने पानी फेर दिया है। - हरदीप
ढेरी के चोरों ओर पानी भरने से धान में नमी
सूखे धान का 2389 रुपये प्रति कुंतल सरकारी रेट है। हर किसान फसल को मंडी में अच्छे रेट पर बेचने की उम्मीद लगाकर आता है। खेत से सूखा धान लेकर आए थे लेकिन मंडी आकर ढेरी के चारों ओर पानी भर गया है। धान में नमी हो गई है। अब यह भी नहीं पता कि कितने रेट में खरीदार इसे खरीदेगा। - गुरमीत सिंह, किसान
व्यवस्था के दावे की पोल बारिश ने खोली
सरकारें किसानों की फसल की सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़े-बड़े दावे करती हैं लेकिन जमीनी हकीकत की पोल इस बारिश ने खोल दी है। किसान का धान खुले आसमां के नीचे भीग रहा है। - अवतार
किसानों की किसी को परवाह नहीं
सेक्टर-20 की अनाज मंडी में किसान के लिए कोई सुविधा नहीं है। मंडी प्रबंधन के पास किसानों की खुले में पड़े धान को ढंकने तक का इंतजाम नहीं है। सरकार का खरीदा हुआ धान टीन शेड में रखा है। किसान की किसी को कोई परवाह नहीं है। - हरपाल सिंह किसान
कोट...
चिन्हित राइस मीलों में धान जा रहा है। उठान का काम हैफेड का है। हमारी कोशिश है कि जल्द ही एक टीन शैड खाली करा दिया जाए जिससे किसानों को अपना धान बाहर खुले में न फैलाना पड़े। - बलदीप सांगवान, मंडी सचिव