अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने सूबे में 14 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को बड़ी राहत देते हुए विभिन्न शुल्कों के रूप में उनका वित्तीय बोझ कम कर दिया है। सरकार का मानना है कि यह अतिरिक्त खर्च उनके विकास और विस्तार में बाधा उत्पन्न कर रहे थे जबकि ये उद्योग प्रदेश में सबसे अधिक रोजगार उत्पन्न करने में मददगार हैं।
अब बैंक ऋणों के विरुद्ध कोलैटरल (लोन के लिए सिक्योरिटी के रूप में उधारकर्ता द्वारा गिरवी रखे जाने एसेट या प्रॉपर्टी) के रूप में रखे गए स्टॉक की ऋण राशि पर सीमित स्टांप ड्यूटी लगेगी। इक्विटेबल मॉरगेज ( लोन लेने के लिए स्वामित्व ट्रांसफर किए बिना अपनी प्रॉपर्टी का कोलैटरल के रूप में उपयोग करना) पर पंजीकरण शुल्क एक लाख रुपये से घटाकर 1,000 रुपये कर दिया गया है।
सीआईआई, पीएचडीसीसीआई, एपीएक्स चैंबर, सीआईसीयू, एफआईसीओ और एसएलबीसी जैसी कई औद्योगिक संस्थाओं ने इस व्यवस्था को दोहरे कर बताते हुए इसमें राहत की मांग कर रही थीं। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद चर्चा करते हुए उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा ने बताया कि अभी तक बैंक ऋणों के विरुद्ध कोलैटरल के रूप में रखे गए स्टॉक पर ऋण राशि का 0.25% स्टांप शुल्क और इक्विटेबल मॉर्गेज की रजिस्ट्री पर 1 लाख रुपये तक की सीमा के साथ अतिरिक्त 0.25% स्टांप शुल्क लागू किया था।
अभी तक लोन लेने वाले उद्यमी को इक्विटेबल मॉर्गेज पर 0.25% शुल्क, गिरवी रखने पर 0.25% शुल्क, और रजिस्ट्री (सीमित) पर 0.25% शुल्क देना पड़ता था, जो कुल मिलाकर लगभग 0.75% की दर से होता था। इस पर उद्यमियों को कड़ा ऐतराज था।
अरोड़ा ने बताया कि पंजाब सरकार ने इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए नोटिफाइड दरों में संशोधन करने का निर्णय लिया है। अब कुल ऋण राशि पर (जिसमें इक्विटेबल मॉर्गेज और गिरवी दोनों शामिल होंगे) सिर्फ 0.25% स्टांप ड्यूटी ही ली जाएगी। जिसकी अधिकतम सीमा पांच लाख रुपये तक होगी। साथ ही इक्विटेबल मॉर्गेज पर रजिस्ट्रेशन शुल्क एक लाख से घटाकर एक हजार रुपये कर दिया है।
कैबिनेट के इस निर्णय के अनुसार भारतीय स्टांप अधिनियम (पंजाब संशोधन) में संशोधन लाने के लिए विधानसभा में एक विधेयक पेश किया जाएगा। उनके अनुसार यह संशोधन पंजाब को देश के अग्रणी औद्योगिक राज्यों की श्रेणी में खड़ा करेगा और राज्य में व्यापार अनुकूल माहौल का परिचायक होगा। इससे पंजाब बड़े निवेशों के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा और इससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में बड़ा सुधार आएगा।