चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने केंद्र के समक्ष एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि पंजाब के पास किसी अन्य राज्य के साथ साझा करने के लिए कोई अतिरिक्त पानी नहीं है। एसवाईएल के मुद्दे को भी अब समाप्त कर दिया जाए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक के दाैरान पंजाब के सीएम भगवंत मान ने पानी के मसले पर भी विस्तृत चर्चा करते हुए उन्हें पानी की स्थिति से अवगत करवाया।
मान ने शाह को बताया कि पंजाब की तीनों प्रमुख नदियों सतलुज, रावी और ब्यास के पानी की उपलब्धता में काफी कमी आई है इसलिए सतलज यमुना लिंक नहर का निर्माण व्यावहारिक नहीं है। इन नदियों के 34.34 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) पानी में से पंजाब को सिर्फ 14.22 एमएएफ आवंटित किया गया था, जो लगभग 40 प्रतिशत है और बाकी हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान को आवंटित किया गया था। हालांकि इनमें से कोई भी नदी वास्तव में इन राज्यों से नहीं बहती।
उन्होंने कहा कि यह पंजाब के साथ घोर अन्याय है, लिहाजा एसवाईएल नहर को बनाने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता क्योंकि यह राज्य और इसके लोगों के हितों के पूरी तरह विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आगे पंजाब का स्टैंड स्पष्ट है कि किसी अन्य राज्य को देने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है इसलिए यह मसला अब खत्म होना चाहिए।
एसवाईएल का मसला दशकों से हरियाणा और पंजाब के बीच बड़ा विवाद बना हुआ है। दोनों सूबों में जब-जब चुनाव आते हैं तो यह मुद्दा प्रमुखता से उठता है।
ढुलाई के लिए विशेष माल गाड़ियां चलाने की अपील
अनाज की ढुलाई और भंडारण की समस्या को उजागर करते हुए मान ने शाह से कहा कि एफसीआई द्वारा पांच महीनों में राज्य से सिर्फ 4 से 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 5 से 6 लाख मीट्रिक टन चावलों की ही ढुलाई की जा रही है। खरीफ मंडीकरण सीजन 2025-26 के 95 लाख मीट्रिक टन चावलों की डिलीवरी की जानी है लेकिन इस समय सिर्फ 20 लाख मीट्रिक टन जगह उपलब्ध है। इसके लिए उन्होंने स्टॉक की ढुलाई के लिए विशेष माल गाड़ियां चलाने की अपील की है।
अफसरों का अनुपात बनाए रखना का मिला भरोसा
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री से कहा कि केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा के अधिकारियों के लंबे समय से चल रहे 60:40 अनुपात को बनाए रखना समय की जरूरत है। पंजाब के आईएएस और पीसीएस अधिकारियों को चंडीगढ़ प्रशासन में मुख्य पदों से बाहर रखा गया है। आबकारी, शिक्षा, वित्त और स्वास्थ्य जैसे विभागों में पदों को स्टेट यूटी कैडर के लिए खोला जा रहा है, जिससे यूटी प्रशासन के प्रभावशाली कामकाज में पंजाब की भूमिका पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने उन्हें भरोसा दिया कि मौजूदा अनुपात को बरकरार रखा जाएगा।
आढ़तियों के कमीशन पर भी हुई बात
सीएम ने शाह को अवगत करवाया कि आढ़तिया कमीशन को 2019-20 के खरीद सीजन से पंजाब कृषि उत्पाद और मार्केटिंग एक्ट 1961 के उपबंधों के विपरीत फ्रीज किया गया है और इस समय गेहूं के लिए कमीशन 46 रुपये प्रति क्विंटल और धान के लिए 45.88 रुपये प्रति क्विंटल तक सीमित किया गया है। साइलोज पर अनाज की खरीद के लिए आढ़तिया कमीशन घटाकर रेगुलर मंडियों के मुकाबले आधा कर दिया गया है। आढ़तिए एजेंट नहीं हैं, वे जरूरी सेवाएं प्रदान करते हैं और उन्हें बनता हक मिलना चाहिए। सीएम ने पंजाब कैडर के अधिकारी को एफसीआई पंजाब के जनरल मैनेजर के रूप में नियुक्त करने का मुद्दा भी उठाया। इस पद पर रेगुलर नियुक्तियां पंजाब कैडर से होती रही हैं।