दोनों राज्यों को बकाये के भुगतान के लिए नोटिस भेजे, कानूनी जंग लड़ने को तैयार पंजाब
सरकार का दावा, भाखड़ा मेन लाइन और अन्य नहरों के रखरखाव का खर्च पंजाब कर रहा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने राजस्थान और हरियाणा से पानी के बकाये की वसूली के लिए मोर्चा खोल दिया है। जल स्रोत मंत्री बरिंदर सिंह गोयल ने बताया कि राजस्थान पर पानी के इस्तेमाल के 1.44 लाख करोड़ रुपये बकाया हैं। हरियाणा पर नहरों के रखरखाव के 312 करोड़ रुपये बकाया हैं।
पंजाब सरकार ने दोनों राज्यों को बकाये के भुगतान के लिए नोटिस भेजे हैं। मंत्री गोयल ने कहा कि राशि न मिलने पर पंजाब सरकार कानूनी कार्रवाई करेगी। उन्होंने बताया कि 1920 में महाराजा बीकानेर के समझौते से राजस्थान को पानी मिल रहा है। गोयल का दावा है कि 1961 के बाद पिछली सरकारों ने भुगतान लेना बंद कर दिया था। अब पंजाब सरकार पुराने समझौते और पानी के इस्तेमाल के आधार पर वसूली कर रही है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान भी इस मुद्दे पर राजस्थान सरकार को घेर चुके हैं। मान ने कहा कि राजस्थान को बकाया देना चाहिए या पानी लेना बंद करना चाहिए। 1920 के समझौते में भुगतान और हर 25 साल बाद समीक्षा का प्रावधान था। पिछली सरकारों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
1960 के समझौते पर पंजाब का सवाल :
राजस्थान पानी के लिए 1920 के समझौते का हवाला देता है। बकाया मांगने पर वह 1960 की व्यवस्था का सहारा लेता है। पंजाब का तर्क है कि 1960 में भुगतान का उल्लेख नहीं था लेकिन 1920 का समझौता रद्द नहीं हुआ था। पंजाब अब इसी आधार पर पुराने समझौते की समीक्षा मांग रहा है।
हरियाणा से नहरों के रखरखाव का पैसा मांगा :
जल स्रोत मंत्री गोयल ने बताया कि हरियाणा ने 2015-16 से नहरों के रखरखाव का पैसा देना बंद कर दिया है। इससे करीब 312 करोड़ रुपये बकाया हो गए हैं। पंजाब भाखड़ा मेन लाइन और अन्य नहरों के रखरखाव पर खर्च कर रहा है। इन नहरों से दूसरे राज्यों को भी पानी मिलता है। पंजाब सरकार अपने आर्थिक अधिकार छोड़ने को तैयार नहीं है और कार्रवाई करेगी।