चंडीगढ़। सरकारी स्कूली बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन और गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए पोषण पूरक आहार की तैयारी और आपूर्ति का काम बड़ी निजी संस्थाओं को आउटसोर्स करने के 2022 के पंजाब सरकार के फैसले को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने याचिका पर पंजाब सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
पब्लिक अगेंस्ट अडल्ट्रेशन वेलफेयर एसोसिएशन ने याचिका दाखिल करते हुए कहा कि आउटसोर्सिंग का कदम सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित सिद्धांतों और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन है, जो गांव या पंचायत स्तर पर स्थानीय स्वयं सहायता समूहों और महिला मंडलों के माध्यम से विकेंद्रीकृत तैयारी और वितरण का आदेश देता है।
याची ने कहा कि 2004 से पंजाब ने वेरका जैसी सरकारी सहकारी समितियों के माध्यम से टेक-होम राशन और मध्याह्न भोजन तैयार करने और वितरित करने के लिए एक विकेंद्रीकृत मॉडल का पालन किया था। हालांकि, 2022 में राज्य ने नए टेंडर जारी किए और चार निजी कंपनियों को ठेके दिए जिनमें से कुछ के पास कथित तौर पर पंजीरी जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ तैयार करने के लिए बुनियादी ढांचे का अभाव था।
याची ने अदालत को बताया कि पंजाब सरकार के फैसले ने निविदा में उच्च कारोबार और क्षमता की शर्तें लगाकर छोटे स्थानीय उत्पादकों को प्रभावी रूप से बाहर कर दिया है। इससे केवल राजनीतिक हस्तियों के करीबी बड़े खिलाड़ी ही पात्र हो सकते हैं। अगर किसी संगठन का कारोबार 35 करोड़ रुपये का है तो उसकी तुलना गांव स्तर पर खिचड़ी या पंजीरी तैयार करने वाले स्वयं सहायता समूह से कैसे की जा सकती है? हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को याचिका पर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। याची ने आरोप लगाया कि आउटसोर्सिंग के कारण उत्पादों गुणवत्ता में खामियां आई हैं।