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सीनेटर बोले, सिंडिकेट की ओर से 26 शिक्षकों की नियुक्तियों पर रोक लगाना गलत

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पीयू में वर्षों बाद होेने जा रही 26 शिक्षकों की भर्तियों पर सिंडिकेट की ओर से रोक लगाए जाने को सीनेटरों ने गलत माना है। उनका मानना है कि सीनेट पीयू की हाई अथॉरिटी है। वहां से जो प्रस्ताव पास होता है उसका पालन सभी को करना होता है। पिछले महीनों में हुई सीनेट की बैठक में प्रस्ताव रखा गया था कि जो विषय एजेंडे में शामिल नहीं गया गया है उस पर शून्य सत्र में चर्चा तो हो सकती है लेकिन उस पर निर्णय नहीं लिया जा सकता है। अति महत्वपूर्ण यदि कोई विषय है तो उस पर बैठक से दो से तीन दिन पहले सप्लीमेंट्री एजेंडा जारी कर उस पर निर्णय लिया जा सकता है। इस पर सभी सीनेट के सदस्यों ने हामी भरी थी। बावजूद इसके सिंडिकेट ने रिक्तियों पर रोक लगा दी। सदस्यों का तर्क है कि इस बिंदु पर सीनेट में भी चर्चा होगी।
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सीनेट में जो निर्णय लिए गए थे उसके खिलाफ जाकर सिंडिकेट ने शिक्षकों की भर्तियों पर रोक लगाई है, जो गलत है। इस पर सीनेट में चर्चा होगी। भर्तियों के प्रकरण को एजेंडे में शामिल किया जाना चाहिए था।
- डॉ. सुभाष शर्मा, सीनेटर
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सिंडिकेट जो चाहती है वह करती है और कर रही है। मनमाने फैसले पीयू के हित में नहीं हैं, इससे नुकसान हो रहा है। शिक्षकों की भर्तियों पर लगाई रोक पर सीनेट में बहस की जाएगी।
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--- वीरेंद्र गिल, सीनेटर
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मैंने कहा था कि बिना एजेंडे के किसी भी विषय पर चर्चा करनी है तो शून्य सत्र में उस प्रकरण को उठाया जाए। एजेंडे में जो चीज शामिल नहीं है उस पर फाइनल निर्णय नहीं होना चाहिए।
-- सत्यपाल जैन, सीनेटर
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डेंटल शिक्षकों की प्रमोशन पॉलिसी लगभग फाइनल थी लेकिन सिंडिकेट ने बिना एजेंडे के उस पर कमेटी बैठा दी। इसके कारण वह पॉलिसी पेंडिंग हो गई। ऐसे ही शिक्षकों की नियुक्तियां रोक दी गई जो गलत है। सिंडिकेट को जो सूट करता है वह करती है।
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- डॉ. अजय रंगा, सीनेटर
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वर्जन--
गलत काम यदि हो रहा है तो उस पर सिंडिकेट बिना एजेंडे के भी निर्णय ले सकती है। इमरजेंसी में तमाम निर्णय लिए जाते हैं। यह निर्णय पीयू के हित में है।
- डॉ. नवदीप गोयल, सिंडिकेट एवं सीनेट मेंबर
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