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Panchkula News: चुनौतियों भरी सेवा, उपचार और सेवा से घायल या बीमार की जान बचाकर होता है गर्व

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संवाद न्यूज एजेंसीपंचकूला। शुरुआत में जब नर्स की नौकरी की तो महज इसे नौकरी ही समझा था। मगर जब काम शुरू किया और जिम्मेदारियों का पता चला तो अहसास हुआ कि यह काम कितना अहम है। जब भी किसी गंभीर रूप से घायल या बीमार की जान उपचार और सेवा करके बचाते हैं तो सुकून मिलता है। इसके अलावा गर्व की अनुभूति होती है। शहर की नर्सिंग अफसरों ने अमर उजाला फाउंडेशन के बैनर तले अंतरराष्ट्रीय नर्सेज डे पर आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में अपने अनुभव साझा किए।
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कार्यक्रम में माैजूद जिला नर्सिंग वेलफेयर एसोसिएशन की प्रधान विनिता बांगड़ ने कहा कि परिवार और काम के बीच सामंजस्य बैठाना बहुत मुश्किल होता है। खासकर महिलाओं के लिए तो यह बड़ी चुनौती होती है। परिवार की सेवा और बच्चों की देखभाल के साथ-साथ कभी दिन में तो कभी रात में ड्यूटी कर पाना बहुत मुश्किल है। लोगों की जान बचाने की जिम्मेवारी का अहसास हर मुश्किल को आसान कर देता है। इसके अलावा अन्य नर्सों ने कहा कि लगातार बढ़ रही तकनीक से काम आसान तो हुआ है, मगर इससे पहले की अपेक्षा ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। नर्सों को तकनीक से परिचित होना पड़ रहा है।


स्टाफ की कमी बड़ी परेशानी
नर्सिंग ऑफिसरों ने बताया कि नर्सिंग स्टाफ की कमी बड़ी समस्या है। इससे वर्क लोड और तनाव दोनों बढ़ते हैं। ऐसे में आत्म संयम और सहन शक्ति को बरकरार रखना पड़ता है। इमरजेंसी की स्थिति में नर्स स्ट्रेचर तक खींचती हैं। जब कोई मरीज अस्पताल आता है तो उसकी जान बचाना ही प्राथमिकता होती है। अगर स्टाफ को बढ़ाया जाए तो काम करने में आसानी हो सकती है।
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कोरोना काल रहा नौकरी का सबसे मुश्किल दौर
नर्सों ने बताया कि नौकरी के दौरान सबसे कठिन समय कोरोना काल रहा। हम उन्हीं लोगों को बचाने के लिए दिनरात एक कर रहे थे, जो सोसायटी में हमसे दूरी बना रहे थे। सैकड़ों स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हुए। ठीक होने के बाद फिर से मरीजों की जान बचाने में जुट गए। कुछ ऐसे लोगों की भी जान बचाई, जिनका साथ अपनों ने छोड़ दिया था। उन्होंने बताया कि जब उपचार और सेवा के बाद भी कोई मरीज दम तोड़ देता था, तो बहुत पीड़ा होती थी। सब एक दूसरे को भरोसा देतीं थीं। इसके बाद दूसरे मरीज की जान बचाने में जुट जाती थीं।

इस अवसर पर ये रहीं मौजूद
अपराजिता कार्यक्रम में सीनियर नर्सिंग ऑफिसर विनिता बांगड़, बिमला शर्मा, गुरमीत कौर खालसा, प्रवीन धिमान, अनिता चिस्ती, निशा आदिवाल और हरविंद्र कौर शामिल हुईं।
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