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Panchkula News: निजी स्कूलों ने अभिभावकों पर डाला 20 हजार का अतिरिक्त बोझ

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पंचकूला। नए शैक्षणिक सत्र से महंगाई की मार अभिभावकों पर पड़ रही है। अभिभावकों को कॉपी, किताब, बच्चों की ड्रेस, जूते, स्कूल बैग सहित अन्य बढ़े दाम पर मिल रहे हैं। इस बार यह महंगाई 20 से 25 फीसदी तक बढ़ गई है। इस मनमानी पर किसी प्रकार से शिक्षा विभाग की ओर से कार्रवाई नहीं हो रही है। महंगाई बढ़ने के बाद अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें इसके लिए अतिरिक्त एक बच्चे पर बीस हजार रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है। इस तरह का आर्थिक बोझ उठाने में अभिभावक असमर्थ हो रहे हैं। स्कूल प्रबंधन के आगे वह मजबूर हो गए हैं। शिक्षा विभाग की ओर से किसी प्रकार की कार्रवाई न तो स्कूलों पर हो रही है और नहीं दुकानदारों पर। सस्ती और बेहतर शिक्षा का केवल ढिंढोरा पीटा जा रहा है।
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इन नामों पर बढ़ा रहे हैं महंगाई
निजी विद्यालयों के प्रबंधन ने एडमिशन, ट्यूशन, विकास सहित अन्य शुल्क के नाम पर 15 से 25 प्रतिशत तक शुल्क में बढ़ोतरी की है। प्रवेश, बिल्डिंग, खेल, पानी, बिजली, चिकित्सा, ट्यूशन फीस के नाम पर मनमाना वसूली की जा रही है। बच्चों के लिए प्रवेश शुल्क, कॉपी, किताब, ड्रेस खरीदने में अभिभावक त्राहिमाम कर रहे हैं। सेक्टर-15 स्थित दुकान पर खरीदारी करने आए रमेश कुमार ने बताया कि उनका बेटा आठवीं में पढ़ रहा है। इस माह 20 हजार का बोझ अतिरिक्त पड़ा है। पढ़ाई का सामान एक निश्चित वेंडर के पास ही मिलता है। ऐसे में पूरी मोनोपोली चल रही है। सेक्टर-5 सतलुज पब्लिक स्कूल के एक अभिभावक ने बताया कि इस माह बच्चों की बुक्स, ड्रेस सभी चीजें 25 फीसदी महंगी मिल रही हैं। एक फिक्स इनकम में वह किस तरह बच्चों को पढ़ाएं। सरकार सस्ती शिक्षा का केवल ढिंढोरा पीटती है। असल सच्चाई कुछ और है।

बताई गई दुकानों पर ही मिल रहा सामान
अभिभावकों ने बताया कि ड्रेस भी लगातार महंगी बिक रही हैं। ड्रेस की दुकान पर आए सुनील कुमार ने बताया कि बच्चे की ड्रेस, जूते और थर्मस, पानी की बोतल के दाम 25 फीसदी महंगे मिल रहे हैं। स्कूलों की ओर से बताई गई दुकानों पर ही यह सामान मिलता है। इस पर कोई अंकुश नहीं लगाया जा रहा है। इस कारण सत्र शुरू होने पर 20 हजार रुपये अधिक बच्चों पर पैसे खर्च हो रहे हैं।
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हर बार केवल नाम की होती है जांचजिले में हर बार नाम की जांच होती है। सभी प्राइवेट स्कूल मनमर्जी चला रहे हैं। ड्रेस, कापी किताब सहित सभी सामान बेचकर अभिभावकों को चपत लगाते हैं। इस तरह के हालात में अभिभावक बच्चों के भविष्य की चिंता में शिकायत भी नहीं कर पाते हैं। शिक्षा विभाग से मांग है कि इस मामले की जांच कर कार्रवाई की जाए।
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-भारत भूषण बंसल, चेयरमैन, प्राइवेट स्कूल पैरेंट्स एसोसिएशन
अभिभावकों पर इस तरह से बढ़ रहा बोझ पुस्तकों के सेट इस तरह से मिल रहे
कक्षा पिछले साल अब
एलकेजी 2500 से 4000 तक 2800 से 5000 रुपये
पांचवीं 5000 रुपये 5500 से 6000 रुपये तक
सातवीं से दसवीं 5500 रुपये तक 6000 से 7000 रुपये तक
जूते, ड्रेस और टिफिन बैग सहित अन्य सामान
कक्षा पिछले साल अब
एलकेजी 2000 2700 रुपये तक
पहली से पांचवीं 3000 3800 रुपये तक
पांचवीं से आठवीं 4000 5000 रुपये तक
आठवीं से बारहवीं 6000 7500 रुपये तक

कोट
शिक्षा विभाग की ओर से कमेटी बनाई जाएगी। अगर अभिभावक इस मुद्दे को लेकर शिकायत देंगे तो विभाग सख्त कार्रवाई करेगा।
सतपाल कौशिक, जिला शिक्षा अधिकारी, पंचकूला शिक्षा विभाग
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