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तैयारी : 1113 डिफाल्टर, मेयर ने डीएमसी को सुनवाई के बाद सीलिंग की कार्रवाई के दिए आदेश, निगम के 52.76 करोड़ रुपये फंसे हैं

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पंचकूला। शहर के 1113 लोग नगर निगम के डिफाल्टर हैं। निगम में इन लोगों ने 52.76 करोड़ रुपया जमा नहीं करवाए हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर मेयर कुलभूषण गोयल सख्त हो गए हैं। उन्होंने नगर निगम के डीएमसी दीपक सुरा को आदेश दिए हैं कि वह डिफाल्टरों को एक बार हियरिंग के लिए बुलाएं। इसके बाद सीलिंग की कार्रवाई करें। निगम एरिया में एक लाख रुपये से अधिक प्रॉपर्टी टैक्स 999 लोगों से लिया जाना है, जोकि लगभग 35.44 करोड़ रुपये है। इसके अलावा 5 लाख रुपये से अधिक प्रॉपर्टी टैक्स अदा ना करने वाले 114 संस्थानों से लगभग साढ़े 17.32 करोड़ रुपये वसूले जाने हैं, जिसमें होटल, बैंक, सरकारी कार्यालय, जिमखाना क्लब, पेट्रोल पंप शामिल हैं। इन्हें नोटिस दिए जा चुके हैं और अब सुनवाई का मौका दिया जाएगा। निगम के अधिकारियों द्वारा हर वर्ष करीब 25 से 30 करोड़ रुपए प्रॉपर्टी टैक्स के रूप में वसूले जाने का लक्ष्य रखा जाता था, लेकिन रिकवरी 7 से 10 करोड़ रुपये ही होती थी। गत वर्ष साढ़े 11 करोड़ रुपए की रिकवरी की गई।
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मेयर कुलभूषण गोयल ने बताया कि इस साल कम से कम 25 करोड़ रुपए की रिकवरी की जाएगी। जो संस्थान प्रॉपर्टी टैक्स जमा नहीं करवाएंगे, उनकी सीलिंग की प्रक्रिया शुरु करने में भी कोई देरी नहीं की जाएगी। मेयर द्वारा लगातार जिन भी कंपनियों और संस्थानों का प्रॉपर्टी टैक्स, टावर की फीस एवं अन्य राशि बकाया है उन्हें वसूलने के लिए अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है, जिसके नतीजे सामने आने लगे हैं। शहर में पिछले कई सालों से विभिन्न टावर कंपनियों द्वारा निगम की जमीन पर टावर तो लगा दिए गए, लेकिन उसकी एवज में दी जाने वाली फीस अदा नहीं की। कुलभूषण गोयल ने निगम आयुक्त, संयुक्त आयुक्त सहित सभी अधिकारियों की बैठक लेकर स्पष्ट निर्देश दिए थे कि टावर कंपनियों के कनेक्शन काट दिए जाएं। हाउस की बैठक में भी यह एजेंडा पास कर दिया गया। पिछले दिनों निगम द्वारा टावर कंपनियों को फीस जमा करवाने के लिए नोटिस दिए गए थे।
जिओ कंपनी ने जमा करवाएं 1.95 करोड़ रुपए
नोटिस के बाद जिओ कंपनी द्वारा एक करोड़ 95 लाख रुपये नगर निगम को जमा करवा दिए गए। यह फीस वर्ष 2019-20 और वर्ष 2020-21 की जमा करवा दी गई है। अलग-अलग दिनों में आरटीजीएस या चेक के माध्यम से यह पैसा नगर निगम के खातों में पहुंच चुका है। अब दूसरी कंपनियां भी अपनी बकाया राशि के बारे में निगम अधिकारियों से पता करने में जुटी हुई हैं और उम्मीद है कि जल्द ही करोड़ों रुपया अन्य कंपनियों द्वारा भी नगर निगम के पास जमा करवा दिया जाएगा।
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शहर में लगभग 290 से अधिक मोबाइल टावर
मेयर कुलभूषण गोयल ने बताया कि शहर में लगभग 290 से अधिक विभिन्न कंपनियों के मोबाइल टावर हैं। नगर परिषद से लेकर नगर निगम तक के अधिकारियों न तो टावरों से फीस वसूली हैं और न ही उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की हैं। मोबाइल टावरों से जहां निगम को राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं इनके द्वारा तय मापदंड का पालन न करने पर यह कभी भी दुर्घटना का सबब बन सकते हैं। यदि कोई कंपनी नियमों का पालन नहीं करती और फीस जमा नहीं करवाती तो उनके कनेक्शन काट दिए जाएं। फीस ना देकर सीधा फायदा मोबाइल टावर कंपनियों को हो रहा है। मोबाइल टावर को लेकर सरकार ने अधिसूचना भी जारी कर रखी, उसका भी पालन टावर करवाने के निर्देश दिए हैं।
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