पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी डोप टेस्ट रिपोर्ट बनाने, फर्जी हैंडीकैप्ड सर्टिफिकेट बनाने, डाक्टरी रिपोर्टों (एमएलआर) में हेराफेरी करके लड़ाई के दौरान चोटों की किस्म में बदलाव करने के अलावा आयुषमान भारत जन स्वास्थ्य योजना के तहत बड़े स्तर पर रिश्वत लेने वाले मानसा अस्पताल के तीन मुलाजिमों को काबू कर एक बड़े स्कैंडल का पर्दाफाश किया है।
विजिलेंस ब्यूरो के मुख्य डायरेक्टर-कम-एडीजीपी बीके उप्पल ने बताया कि सिविल अस्पताल मानसा के कर्मचारियों द्वारा विभिन्न तरीकों से धांधलियां कर भ्रष्टाचार किया जा रहा था। विजिलेंस ब्यूरो को प्राप्त सूचना के आधार पर 4 महीने से चलाए ऑपरेशन के दौरान जानकारी हासिल हुई कि विजय कुमार लैब टेक्नीशियन, दर्शन सिंह फार्मासिस्ट और तेजिंदरपाल शर्मा वित्त-कम-लॉजिस्टिक अफसर (एफएलओ) द्वारा लोगों को झूठी डोप टेस्ट रिपोर्ट जारी करने, फर्जी हैंडीकैप्ड सर्टिफिकेट जारी करवाने, एमएलआर में हेराफेरी करके चोट की किस्म में बदलाव करने और आयुषमान भारत जन स्वास्थ योजना के अंतर्गत बड़े स्तर पर रिश्वत ले रहे थे।
परमजीत सिंह विर्क सीनियर पुलिस कप्तान विजिलेंस ब्यूरो बठिंडा रेंज के नेतृत्व में विजिलेंस ब्यूरो बठिंडा रेंज की टीम द्वारा कार्रवाई करते हुए उक्त तीनों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करके गिरफ्तार किया गया है। ये कर्मचारी कुछ प्राइवेट अस्पतालों के मालिकों/डाक्टरों से मिलकर आयुषमान भारत जन स्वास्थ योजना के अंतर्गत मरीजों के केस सिविल अस्पताल मानसा से प्राइवेट अस्पतालों को रेफर कर देते थे। इस योजना का दुरुपयोग करते हुए यह कर्मचारी उन मामलों में भी बड़े स्तर पर रिश्वत हासिल करते थे।
सिविल अस्पताल मानसा में डोप टेस्ट करवाने के लिए आए व्यक्तियों में से जिन व्यक्तियों के नतीजे पॉजिटिव आते थे, उनसे करीब 10,000 रुपये प्रति व्यक्ति रिश्वत के तौर पर हासिल करके डोप टेस्ट का पॉजिटिव नतीजा बदलकर निगेटिव कर दिया जाता था। इस प्रकार कई नशेड़ी व्यक्ति भी हथियार लाइसेेंस बनवाने और रिन्यू करवाने में सफल हो जाते थे। सिविल और पंजाब पुलिस में नौकरी करते कई अधिकारी/कर्मचारी, जो नशे के आदी हो चुके थे, वह भी रिश्वत देकर डोप टेस्ट में पास हो जाते थे।