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Panchkula News: फर्जी अमेजन एजेंट बनकर अमेरिकियों को लगाते थे चपत, इंटरनेशनल गैंग का पर्दाफाश, 21 गिरफ्तार

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पंचकूला से चल रहा था इंटरनेशनल साइबर रैकेट, चार मास्टरमाइंड सात दिन के रिमांड पर
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लाखों की नकदी, क्रिप्टो वॉलेट, कंप्यूटर सिस्टम, विदेशी मुद्रा, सोने के आभूषण और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पंचकूला पुलिस ने सेक्टर-2 स्थित एक फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। अमेरिका के नागरिकों को अमेजन कंपनी का कर्मचारी बनकर ठगने वाले गिरोह के 21 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें चार मुख्य आरोपी शामिल हैं, जिन्हें अदालत में पेश कर सात दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। पुलिस ने मौके से लाखों रुपये की नकदी, क्रिप्टो वॉलेट, कंप्यूटर सिस्टम, विदेशी मुद्रा, सोने के आभूषण और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।
गिरफ्तार मुख्य आरोपियों की पहचान राजा सिद्दीकी (मोहाली), अक्षय उर्फ टिक्कू (पंचकूला), नवदीप बेदी उर्फ राज (बटाला, पंजाब) और अंकुर कपूर (पंचकूला) के रूप में हुई है। पुलिस ने चारों को अदालत में पेश कर सात दिन के रिमांड पर लिया है। वहीं कॉल सेंटर में ऑपरेटर के रूप में काम कर रहे 17 युवक-युवतियों को पूछताछ के बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया। पुलिस के अनुसार ये कर्मचारी चंडीगढ़, मोहाली, पंजाब, हरियाणा, बिहार, दिल्ली और कोलकाता समेत विभिन्न क्षेत्रों से यहां काम करने आए थे। अब यह जांच की जा रही है कि उन्हें साइबर ठगी की जानकारी थी या वे केवल नौकरी के नाम पर कॉल सेंटर में कार्यरत थे।
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पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि सेक्टर-2 स्थित एक इमारत की पहली मंजिल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित किया जा रहा है। सूचना के आधार पर साइबर क्राइम थाना, स्टेट साइबर टीम और विभिन्न क्राइम यूनिटों ने संयुक्त रूप से देर रात छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में युवक-युवतियां कंप्यूटर सिस्टम, हेडसेट और इंटरनेट आधारित सॉफ्टवेयर के माध्यम से विदेशी नागरिकों से बातचीत करते मिले।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी विशेष सॉफ्टवेयर के जरिए विदेशी नागरिकों को कॉल कर खुद को अमेजन यूएसए का कस्टमर सर्विस प्रतिनिधि बताते थे। बातचीत के दौरान वे लोगों को झांसे में लेकर उनकी निजी जानकारी हासिल करते थे। इसके बाद उन्हें एनीडेस्क जैसी रिमोट एक्सेस एप्लिकेशन डाउनलोड करवाई जाती थी, जिससे आरोपी उनके कंप्यूटर सिस्टम तक पहुंच बना लेते थे।
पुलिस के अनुसार आरोपी तकनीकी खामियों और सुरक्षा संबंधी खतरों का डर दिखाकर पीड़ितों को गिफ्ट कार्ड खरीदने के लिए प्रेरित करते थे। बाद में इन गिफ्ट कार्डों को विभिन्न माध्यमों से रिडीम कर रकम हासिल की जाती थी। जांच में सामने आया है कि पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था।

11.30 लाख नकद, क्रिप्टो वॉलेट और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद
डीसीपी क्राइम एंड ट्रैफिक अमरिंदर सिंह ने बताया कि छापेमारी के दौरान 19 कंप्यूटर सिस्टम, तीन लैपटॉप, 16 हेडसेट, दो पीओएस मशीनें, तीन वॉकी-टॉकी सेट, दो वाई-फाई राउटर, नोट गिनने की मशीन, एक मोहर, हार्ड क्रिप्टो वॉलेट, 11.30 लाख रुपये नकद, विदेशी मुद्रा, सोने के आभूषण, डायमंड टॉप्स, चेन, कड़ा और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं।

हवाला और क्रिप्टो ट्रांजेक्शन की भी जांच
जांच में यह भी सामने आया है कि ठगी से अर्जित रकम को हवाला नेटवर्क और क्रिप्टो ट्रांजेक्शन के जरिए विभिन्न राज्यों में भेजा जाता था। पुलिस को कई डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
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पहले भी पकड़े जा चुके हैं फर्जी कॉल सेंटर
गौरतलब है कि सेक्टर-2 में इससे पहले भी फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ हो चुका है। कुछ वर्ष पहले पुलिस ने इसी क्षेत्र में छापेमारी कर विदेशी नागरिकों को निशाना बनाने वाले साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया था। इसके बावजूद साइबर अपराधी नए नाम और नए तरीकों से ऐसे अवैध कॉल सेंटर संचालित करने की कोशिश करते रहे हैं।
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