कालका। महिला दिवस पर कालका की बहू डॉ. ललिता ने अपने संघर्ष के लम्हों को सांझा किया। उन्होंने बताया कि जीवन में अनेक उतार-चढ़ाव आने के बावजूद पति की प्रेरणा से पीएचडी की उपाधि सहित कई अन्य सम्मान हासिल किए। डॉ. ललिता चौ. चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (हिसार) में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर टेक्सटाइल अपैरल डिजाइनिंग कार्यरत हैं। इससे पहले वह कई अन्य कॉलेजों में पढ़ा चुकी हैं।
ललिता ने बताया कि उनका पढ़ने का सपना पहले महिला, दूसरा अनुसूचित जाति, तीसरा जागरूकता की कमी व चौथा गरीबी की वजह से मायके में ही अधूरा रह गया था लेकिन, ससुराल में आकर उसने यह पूरा किया। उन्होंने मायके में मां महादेवी के प्रयासों से बीएससी की थी। इसके उपरांत 8 वर्ष के अंतराल बाद ससुर स्व. मदन लाल के सहयोग से बीएड की लेकिन, वार्षिक परीक्षा से पूर्व ससुर का देहांत हो गया।
डॉ. ललिता ने बताया कि उच्चतम शिक्षाओं को ग्रहण करने के लिए पति दिनेश ने मुझे 9 वर्ष तक प्रेरित किया। हमारे समाज मे खासकर महिलाओं को पढ़ाने का प्रचलन नहीं है। गांव में तो स्थिति और भी भयावह है। इस मिथक को तोड़ने की जिम्मेदारी हमारी है। उन्होंने सभी से अपील की है कि बेटों के साथ बेटियों और बहुओं को भी पढ़ाएं।
ये उपलब्धियां कीं हासिल
ललिता ने अथक परिश्रम से 2010 में यूजीसी की ओर से जेआरएफ अवॉर्ड प्राप्त किया और प्रथम श्रेणी में एमएससी के बाद पीएचडी की उपाधि ली व इंटरनेश्नल जरनल ऑफ साइंस द्वारा बेस्ट पेपर अवॉर्ड सम्मान हासिल किया।
लक्ष्य पाने के लिए सकरात्मक सोच जरूरी
डॉ. ललिता ने युवाशक्ति को संदेश देते हुए कहा की जीवन मे सफल होने के लिए आपके दिमाग मे अपने लक्ष्य से संबंधित बातें चलती रहनी चाहिए। अपनी रूचि के अनुसार ही करियर का चुनाव करें साथ ही साथ अपनी क्षमता का भी ख्याल रखें। एक निश्चित और सही कार्य योजना बनाकर उसमें दृढ़तापूर्वक लग जाइए। एक दिन आपको सफलता जरूर मिलेगी।