फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पीजीआई में पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने में लग रहे तीन से चार महीने

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। पीजीआई में पोस्टमार्टम रिपोर्ट लेने के लिए लोगों को महीनों चक्कर काटने पड़ रहे हैं। सामान्य मामले तो छोड़ दीजिए, यहां उन मामलों की रिपोर्टिंग में भी अनदेखी की जा रही है, जिसे तत्काल दे देना चाहिए। मिसकैरेज (गभर्पात) से जुड़े एक मामले में रिपोर्ट देने में जब तीन महीने से ज्यादा का समय गुजर गया तो संबंधित व्यक्ति ने यूनियन के माध्यम से उसे लेने का प्रयास किया। यूनियन की दखल पर जो रिपोर्ट मिली, वह हैरान करने वाली थी। रिपोर्ट के नाम पर महज यह लिखकर दे दिया गया कि पोस्टमार्टम के लिए मिले भ्रूण के ऑर्गन खराब (ऑटोलाइज्ड) हो गए थे। इस वजह से उसका पोस्टमार्टम नहीं हो सका। अब यह मामला पीजीआई डायरेक्टर के ध्यान में लाया गया है।
विज्ञापन

यह मामला पुलिस डिपार्टमेंट के एक उच्चाधिकारी का है। इसमें प्रेग्नेंसी के केस में मिसकैरेज रोकने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट को अहम माना जा रहा था। पीजीआई इंप्लाइज यूनियन नॉन फैकेल्टी के प्रेसिडेंट अश्वनी कुमार मुंजाल ने बताया कि 30 अगस्त 2019 को पोस्टमार्टम की डेट दी गई थी। 14 नवंबर तक रिपोर्ट नहीं दी गई। प्रेग्नेंसी से जुड़ा मामला होने के कारण आगे बेबी प्लान करने के लिए गाइनकोलॉजिस्ट को रिपोर्ट दिखानी जरूरी थी ताकि वे रिपोर्ट के आधार पर आगे का ट्रीटमेंट प्लान कर सकें। रिपोर्ट लेने के लिए पीड़ित हफ्ते में दो से तीन बार खुद पीजीआई आते थे। हर बार उन्हें अगले हफ्ते आने की बात कहकर लौटा दिया जा रहा था।
जब यूनियन ने संबंधित डिपार्टमेंट से संपर्क किया तो अगले 24 घंटे में रिपोर्ट दे दी गई। दुखद यह रहा कि उसमें पोस्टमार्टम रिपोर्ट की बजाय भ्रूण के ऑर्गन खराब होने की बात लिखी गई थी, जिससे पोस्टमार्टम नहीं हो सका था। अश्वनी कुमार का कहना है कि डिपार्टमेंट की अनदेखी और मनमानी से ऐसी स्थिति देखी जा रही है। इस संबंध में पीजीआई डायरेक्टर से भी शिकायत की गई है। बता दें कि पोस्टमार्टम में देरी की शिकायत पर डायरेक्टर डॉ. जगतराम चंद महीने पहले ही नई ड्यूटी लिस्ट जारी क र चुके हैं। लिस्ट में डाक्टरों की संख्या पांच से बढ़ाकर 14 कर दी गई है। उन्होंने मेडिकोलीगल और क्लीनिकल दोनों तरह के मामले में 24 घंटे के अंदर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन

पीजीआई में पोस्टमार्टम का दबाव बहुत ज्यादा है। मेडिकोलीगल से जुड़े मामलों में 48 घंटे के अंदर हर हाल में रिपोर्ट दे दी जाती है। पुलिस संबंधी मामले में कभी-कभार देरी हो जाती है। क्लीनिकल पोस्टमार्टम की बात है तो उसमें किसी मामले में खास वजह से देरी हो गई तो अलग बात है, आमतौर पर ऐसा होता नहीं है-प्रो. जगतराम, डायरेक्टर, पीजीआई
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें