हिमाचल के सिरमौर से आए मुनीश (बदला हुआ नाम) की कॉमन बाइल डक्ट (सीबीडी-पित्त की थैली के आगे वाली पाइप) स्टोन की वजह से ब्लॉक हो गई थी। वह 22 अगस्त को पीजीआई की इमरजेंसी में आए थे और उन्हें 27 अगस्त को ऑपरेशन की डेट दे दी गई थी। इसके बाद उन्होंने सारा सामान मंगवा लिया। मंगलवार सुबह उन्हें ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया लेकिन कुछ देर बाद उनसे कहा गया कि कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से आज सर्जरी नहीं हो पाएगी। उसके बाद उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा। अब उनकी बाद में सर्जरी होगी।
मुनीश जैसे करीब 150 मरीज ऐसे थे, जिन्हें मंगलवार को पीजीआई में आपरेशन थियेटर से लौटा दिया गया। नेहरू हास्पिटल के चौथे व पांचवें फ्लोर पर मंगलवार को सर्जरी ठप रही। जो बहुत ही गंभीर मरीज थे, जिनकी सर्जरी टाली नहीं जा सकती थी, उनमें से तीन से चार मरीजों की ही सर्जरी की गई। हालांकि इमरजेंसी व आई सेंटर में सर्जरी जारी रही। आपरेशन टलने की मुख्य वजह कांट्रैक्ट वर्करों की हड़ताल रही है। सफाई कर्मचारियों के नहीं होने से आपरेशन थियेटर सैनिटाइज नहीं हो पा रहे थे। इस वजह से सभी आपरेशन टाल दिए गए।
पीजीआई कांट्रैक्ट वर्कर यूनियन के आह्वान पर तीन हजार कर्मचारी सोमवार व मंगलवार को हड़ताल पर रहे। इनमें कांट्रैक्ट पर तैनात सफाई कर्मचारी, हास्पिटल अटेंडेंट, लिफ्ट ऑपरेटर, माली, किचन डिपार्टमेंट, हॉस्पिटल अटेंडेंट, सेनेटरी अटेंडेंट, डायलिसिस टेक्नीशियन शामिल हैं। उनकी प्रमुख मांग सामान काम, सामान वेतन है। आपरेशन थियेटर से लौटाए गए मरीजों के परिजनों का कहना था कि अस्पताल प्रशासन को हड़ताल की सूचना पहले से ही मिल गई थी लेकिन पीजीआई की ओर से इसके इंतजाम नहीं किए गए। एक दिन पहले तक अटेंडेंट को नहीं बताया गया। यदि पहले से ही बता देते हैं तो उन्हें इतनी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। हालांकि देर शाम हाईकोर्ट ने हड़ताल पर रोक लगा दी है।