कोरोना के केसों में गिरावट के बावजूद पीजीआई प्रशासन अभी ओपीडी खोलने के पक्ष में नहीं है। रविवार को पीजीआई की ओर से जारी बयान में कहा गया कि त्योहारी सीजन में कोरोना का ग्राफ बढ़ने की आशंका से अभी इंकार नहीं किया जा सकता। पीजीआई ने मरीजों से अपील की कि जब तक न्यू ओपीडी नहीं खुलती है, तब तक टेलीफोन के माध्यम से परामर्श लेते रहे। पीजीआई ने यह भी कहा कि उसके विशेषज्ञ कोरोना की स्थितियों पर नजर बनाए हुए हैं और ओपीडी को दोबारा से खोलने के प्रयास जारी हैं।
बीते हफ्ते चंडीगढ़ प्रशासन की समीक्षा बैठक में प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने कहा था कि कोरोना के केस कम हो रहे हैं। ऐसे में चिकित्सा संस्थान को ओपीडी खोलने पर विचार करना चाहिए। पीजीआई की ओपीडी पिछले सात महीने से बंद है। इससे नॉन कोविड मरीज (शुगर, हार्ट, किडनी, हड्डी, लिवर के मरीज इत्यादि) की परेशानी बढ़ र्गई है। मार्च से पहले पीजीआई की ओपीडी में रोजाना 10 हजार से ज्यादा मरीज आते थे। कोविड-19 आने के बाद पीजीआई ने कुछ नंबर जारी किए। इन नंबरों के जरिए मरीज डाक्टर से परामर्श लेते हैं। इसके माध्यम से रोज औसतन 1800-2200 मरीजों को चिकित्सीय सलाह दी जाती है।
कोरोना काल में 27 हजार से ज्यादा सर्जरी
पीजीआई निदेशक प्रो. जगतराम ने कहा कि कोविड-19 के मरीजों के साथ-साथ नॉन कोविड मरीजों के इलाज पर भी संस्थान ने ध्यान केंद्रित किया है। टेलीफोन के माध्यम से 19 मई से लेकर अब तक चार लाख रोगियों को परामर्श दिया जा चुका है। इसके अलावा 27,722 मरीजों की सर्जरी की गई है। 30 हजार से ज्यादा रोगियों को दाखिल कर विभिन्न डिपार्टमेंट ने उपचार किया है। इसके अलावा गाइनी, रेडियोथैरेपी और नेत्र विभाग की ओपीडी चालू रहीं। पीजीआई ने यह भी बताया कि 16 अक्तूबर से परामर्श देने वाली टेलीफोन की लाइनों को बढ़ाया गया पहले आठ बजे से लेकर साढ़े नौ बजे तक समय था, उसे बढ़ाकर साढ़े दस बजे तक किया गया।
नॉन कोविड मरीज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों के लिए पीजीआई पूरी तरह से सचेत है और ओपीडी खोलने के लिए उत्सुक भी। पीजीआई की ओपीडी में रोजाना दस हजार से ज्यादा मरीज आते थे। अभी कोरोना खत्म हुआ नहीं है। ऐसे में इतनी भीड़ नुकसान दायक साबित हो सकती है। अभी हमें थोड़ा और इंतजार करना होगा। जल्दबाजी में लिया गया निर्णय किसी के भी जीवन को खतरे में डाल सकता है।
-प्रो. जगतराम, निदेशक, पीजीआई