शहर में स्ट्रे डॉग्स का हल निकालने में नगर निगम पूरी तरह विफल रहा है। रोजाना लोग कुत्तों की समस्या से जूझ रहे हैं और कई लोगों को ये कुत्ते शिकार भी बना चुके हैं। कुत्तों का भय इतना है कि बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों ने शाम और सुबह के वक्त घर से निकलना बंद कर दिया है। लोगों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। सेक्टर 16 में यह समस्या काफी गंभीर हो गई है। लोग लगातार पार्षद, मेयर और अधिकारियों को शिकायत दे रहे हैं।
एक सर्वे के मुताबिक शहर में लगभग 5 हजार स्ट्रे डॉग हैं। इनकी संख्या में लगातार बढ़ोतरी नगर निगम के लिए सिरदर्द बन गई है। पिछले साल निगम ने कुत्तों की नसबंदी कराने का फैसला लिया था। लेकिन बीच में ही इस काम को रोक दिया गया। सेक्टर 16 निवासी आशीष मक्कड़ ने बताया कि सेक्टर 16 के मकान नंबर 536 से लेकर 557 तक यह समस्या काफी गंभीर है। वह पार्षद भावना गुप्ता, मेयर उपिंद्र कौर आहलुवालिया से लेकर निगम अधिकारियों को बता चुके हैं, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। कोई भी कर्मचारी इन कुत्तों को पकड़ने के लिए नहीं आया।
कुत्तों के खूंखार होने का कारण
पेट एनिमल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से शहर के स्ट्रे डॉग्स पर कराए सर्वे में सामने आया था कि इन कुत्तों में काफी हद तक आयरन की है। चिकित्सकों के अनुसार आयरन कम होने का सीधा असर कुत्तों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर होता है। कुत्ते आसानी से मामूली बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। कुत्तों में चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ता है। जिससे गर्मी और चिड़चिड़ेपन के कारण कुत्ते हिंसक हो रहे हैं।
स्थानीय निवासी रामप्रसाद ने कहा कि स्ट्रे डॉग्स का लोगों में डर है। वहीं निगम के खिलाफ काफी गुस्सा है। शिकायत पर आश्वासन दे दिया जाता है कि जल्द कुछ न कुछ करेंगे, लेकिन कदम नहीं उठाया जाता। सिविल अस्पताल में कुत्ते के काटने वाले मरीजों की लंबी कतार लगी रहती है। सेक्टर 16 निवासी एसके वोहरा ने कहा कि शहर का कोई भी ऐसा सेक्टर नहीं है जहां कुत्तों का आतंक न हो। हर सेक्टर से नगर निगम में शिकायत जा रही है। इतना आतंक फैलने के बावजूद नगर निगम और स्थानीय प्रशासन अब तक मौन है।