जरा हटके, जरा बचके। ये है पंचकूला मेरी जान। यह फिल्म का गाना जरूर है, लेकिन यह गीत शहर में लगे पुराने पेड़ों से बचकर चलने का इशारा कर रहे हैं। जब भी आप दफ्तर या किसी कार्य के लिए घर से बाहर निकलें तो सड़क किनारे लगे इन पड़ों से दूरी बनाकर चलें।
कहीं ये पेड़ अचानक आपके ऊपर गिरकर आपको घायल न कर दें। क्योंकि इन पेड़ों का कोई वारिस कोई नहीं है। ये दो विभागों की खींचतान में लावारिस बनकर रह गए हैं। बागवानी विभाग और नगर निगम की दलीलें सुनकर अंदाजा लगा पाना मुश्किल है कि सेक्टरों में लगे पेड़ों की जिम्मेदारी किसकी है।
इसका पूरा फायदा आज की डेट में दीमक उठा रहे हैं। ये वर्षों पुराने इन पेड़ों को बीमार करने में लग गए हैं। इन पेड़ों को देखकर अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि ये अंदर से कितने खोखले हो चुके है और कब धराशाही हो जाएंगे।
पुराने सेक्टरों में लगे पेड़ों की जड़ में लगे दीमक
पंचकूला में कुल 28 सेक्टर हैं। इन सभी सेक्टरों में लगे पड़ों की जड़ों को दीमक खोखला बना रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा पुराने सेक्टरों में लगे पेड़ों को दीमक खोखला बना रहे हैं। इसका मुख्य कारण जमीन तो हैं ही, लेकिन समय-समय पर छिड़काव का न होना भी उतना ही बड़ा कारण है।
इन सेक्टरों में इतने पेड़ों में लगे दीमक
- सेक्टर 15 में करीब दो सौ पेड़ों में लगे दीमक
- सेक्टर 16 में करीब 135 पेड़ों में लगे दीमक
- सेक्टर 7 में करीब डेढ़ सौ पेड़ों में लगे दीमक
- सेक्टर 18 में करीब 125 पेड़ों में लगे दीमक
- सेक्टर 8 में करीब 140 पेड़ों में लगे दीमक
- सेक्टर 10 में करीब 170 पेड़ों में दीमक
स्प्रे का सिर्फ एक सप्ताह तक असर
बागवानी विभाग के मुलाजिमों के मुताबिक पेड़ों पर स्प्रे का असर सिर्फ एक सप्ताह तक रहता है। यहां तो सेक्टर के अंदर पेड़ों पर स्प्रे कब हुआ, स्थानीय लोगों को याद तक नहीं है। ऐसे में पेड़ों को दिमक से कौन बचाएगा।
जमीन के अंदर दीमक की भरमार
पंचकूला जमीन के अंदर दीमक की भरमार है। यहां लगे पुराने पेड़ों पर हर सप्ताह स्प्रे होना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ आने वाले समय में एक दिन दीमक पंचकूला के सभी पुराने पेड़ों की जड़ों को खोखला कर गिरा देंगे और अन्य नए से पुराने हुए पुराने हुए पेड़ों को अपना निशाना बनाएंगे।
मेन रोड पर सड़क किनारे लगे पेड़ों का भी बुरा हाल
जिन पेड़ों की जिम्मेदारी बागवानी की है उन पेड़ों की भी सही तरीके से देखरेख नहीं हो पा रही है। उन पेड़ों में भी दीमक घर बना चुके हैं। अक्सर बारिश और आंधी में सड़क किनारे पेड़ गिरते रहते हैं और यातायात बाधित होता है। इन पेड़ों पर भी वीवीआई के आने पर हीं छिड़काव और चुने की पोताई की जाती हैs।
क्या कहते हैं नगर निगम के डिप्टी मेयर सुनीत तलवार
नगर निगम के पास पेड़ों की देखरेख के लिए स्टाफ की कमी है। अभी करीब तीन माह पहले हाउस की मीटिंग में निर्णय लिया गया कि पेड़ों की जिम्मेदारी बागवानी विभाग को सौंपी जाएगी। इसके लिए विभाग को बकायदा लेटर भी लिखा गया है।
क्या कहते हैं बागवानी विभाग के एससी हरदीप मलिक
सेक्टर के अंदर लगे पेड़ों की जिम्मेदारी नगर निगम की है। इसकी देखरेख बागवानी विभाग नहीं करेगा। सिर्फ सेक्टर के बाहर मेन रोड पर लगे पेड़ों की ही जिम्मेदारी बागवानी विभाग की है।