छह वर्षीय बच्ची पर हमला कर गंभीर रूप से घायल करने वाले आठ वर्षीय छात्र का दाखिला भी अब जांच के दायरे में आ गया है। छात्र फिलहाल बाल सुरक्षा गृह में है, जहां उसकी काउंसलिंग की जा रही है।
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पंचकूला के एक सरकारी स्कूल में छह वर्षीय बच्ची पर हमले की घटना ने स्कूल की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षकों और स्टाफ की तैनाती से लेकर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और कमरों को खुला छोड़ने तक, हर स्तर पर हुई संभावित चूक की अब जांच होगी।
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शिक्षा विभाग की दो अलग-अलग कमेटियां सोमवार को स्कूल पहुंचीं। दोनों ने अपने-अपने स्तर पर जांच करते हुए स्कूल का रिकॉर्ड कब्जे में लिया। बीईओ की अध्यक्षता वाली टीम ने करीब दो घंटे तक वारदात के समय मौजूद कार्यवाहक इंचार्ज और दोनों अध्यापिकाओं से पूछताछ की। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि घटना के बाद बच्ची को अस्पताल पहुंचाने और उपचार शुरू कराने में देरी क्यों हुई।
चार बिंदुओं पर केंद्रित रही पूछताछ
बीईओ की टीम में दो सीनियर प्रिंसिपल भी शामिल हैं। टीम ने स्कूल में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की पड़ताल के लिए चार प्रमुख पहलुओं पर सवाल-जवाब किए।
शिक्षकों की मौजूदगी और ड्यूटी: टीम ने पूछा कि घटना के समय किस शिक्षक की किस कक्षा में ड्यूटी थी और सहायक स्टाफ कहां तैनात था। जांच में पहले ही सामने आ चुका है कि 30 बच्चों पर एक शिक्षक के मानक के मुकाबले स्कूल में करीब 70 बच्चों पर एक शिक्षक तैनात था। ऐसे में बच्चों की निगरानी की जिम्मेदारी किसके पास थी, इसकी भी पड़ताल की गई।
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सीसीटीवी निगरानी में चूक: प्रिंसिपल के कमरे में सभी कैमरों की स्क्रीन लगी होने के बावजूद बच्ची के स्कूल से बाहर निकलने की जानकारी समय पर क्यों नहीं मिली, टीम ने इस पर सवाल किए। प्रिंसिपल के स्कूल छोड़ने के बाद कैमरों की निगरानी की जिम्मेदारी किसे सौंपी गई थी, इसकी भी जानकारी मांगी गई।
कमरे खुले छोड़ने की लापरवाही: परीक्षा केंद्र के निरीक्षण के दौरान पहली मंजिल के कमरे खोले गए थे। आरोप है कि निरीक्षण के बाद वॉचमैन ने कमरों पर ताला नहीं लगाया। इसी खुले कमरे में तीसरी कक्षा के छात्र ने बाल वाटिका की बच्ची के साथ वारदात की। टीम ने वॉचमैन और सहायक स्टाफ से पूछा कि निरीक्षण के बाद कमरों को बंद करने की जिम्मेदारी किसकी थी और ताला क्यों नहीं लगाया गया।
मिड-डे मील और खेल नर्सरी: भोजन वितरण के समय मौजूद स्टाफ की भूमिका और स्कूल परिसर में संचालित खेल नर्सरी के संचालक की गतिविधियों के बारे में भी जानकारी जुटाई गई। टीम ने यह जानने का प्रयास किया कि उस समय परिसर में कौन-कौन मौजूद था और बच्चों की निगरानी की व्यवस्था कैसी थी।
डीईईओ कमेटी ने कब्जे में लिया स्कूल का रिकॉर्ड
डीईईओ सुमन चौधरी, डिप्टी डीईईओ और उपायुक्त कार्यालय के अधिकारियों की टीम ने भी स्कूल पहुंचकर जांच की। कमेटी ने स्कूल का रिकॉर्ड कब्जे में लेकर शिक्षकों की हाजिरी, ड्यूटी के घंटे, संभावित लापरवाही और बाहरी लोगों की स्कूल परिसर में मौजूदगी से जुड़े पहलुओं की पड़ताल शुरू की है।
सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगाए 20 नए कैमरे
घटना के बाद स्कूल प्रबंधन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए 20 नए सीसीटीवी कैमरे लगवाए हैं। रविवार और सोमवार को वाइस प्रिंसिपल की निगरानी में लगाए गए इन कैमरों से सीढ़ियों, बरामदों, कॉरिडोर, मुख्य गेट, खेल नर्सरी, पार्किंग और स्कूल की चारों दीवारों को कवर किया गया है।
बच्ची को अस्पताल पहुंचाने में देरी की भी जांच
डीईईओ सुमन चौधरी की अध्यक्षता वाली समिति घटना के बाद की पूरी प्रक्रिया की भी जांच कर रही है। इसमें बच्ची को स्कूल से अस्पताल पहुंचाने, वहां से रेफर किए जाने और पीजीआई में उपचार शुरू होने तक लगे समय की पड़ताल शामिल है। डीईईओ सुमन चौधरी ने बताया कि बीईओ के नेतृत्व वाली टीम ने स्कूल में सभी संबंधित पहलुओं की जांच की है। निलंबित प्रिंसिपल और अध्यापिकाओं से भी पूछताछ की गई है। जांच के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शिक्षा निदेशकों को भेजी जाएगी।
आरोपी छात्र का दाखिला भी जांच के घेरे में, काउंसलिंग रिपोर्ट के बाद होगा फैसला
छह वर्षीय बच्ची पर हमला कर गंभीर रूप से घायल करने वाले आठ वर्षीय छात्र का दाखिला भी अब जांच के दायरे में आ गया है। छात्र फिलहाल बाल सुरक्षा गृह में है, जहां उसकी काउंसलिंग की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि बच्चे की मानसिक स्थिति स्पष्ट होने तक उसके भविष्य को लेकर कोई फैसला लेना जल्दबाजी होगी। इसके लिए डॉक्टरों और न्यायविदों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, छात्र के दाखिले के समय जमा कराए गए दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। बाल आयोग ने सवाल उठाया है कि दाखिले के समय बच्चे का व्यवहार संबंधी मूल्यांकन किया गया था या नहीं और क्या पहले भी उसके व्यवहार को लेकर कोई शिकायत मिली थी।
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सुमन चौधरी ने बताया कि छात्र की आगे की पढ़ाई पर जांच रिपोर्ट और संबंधित विभागों की संयुक्त बैठक के बाद निर्णय लिया जाएगा। नाबालिग होने के कारण जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के प्रावधानों का पालन किया जाएगा। उसकी शिक्षा बाधित न हो, इसका भी ध्यान रखा जाएगा। सुरक्षा के मद्देनजर उसे दूसरे स्कूल में भेजने या विशेष काउंसलिंग के बाद कक्षा में बैठाने के विकल्प पर विचार किया जा सकता है।
निमहांस बंगलूरू की गाइडलाइन पर बच्चे का मेंटल असेसमेंट
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज (निमहांस), बंगलूरू की गाइडलाइन के आधार पर जीएमसीएच-32 के तीन डॉक्टरों के पैनल ने आठ वर्षीय बच्चे का मानसिक और व्यवहार संबंधी विस्तृत आकलन किया। इसमें बच्चे की याददाश्त, समझ, तर्क क्षमता, आईक्यू, व्यवहार और मानसिक स्थिति को परखा गया।
पैनल ने अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पंचकूला पुलिस को सौंप दी है। अब सोशल बोर्ड बच्चे की रिपोर्ट और सामाजिक पृष्ठभूमि का आकलन करने के बाद तय करेगा कि उसे माता-पिता के साथ घर भेजना सुरक्षित है या जुवेनाइल होम में ही रखा जाए। हालांकि, जरूरत पड़ने पर इस प्रक्रिया में शिक्षकों और दोस्तों से भी बातचीत की जा सकती है।
28 अक्तूबर की घटना के बाद से आरोपी बच्चा अंबाला स्थित जुवेनाइल होम में है जबकि छह वर्षीय बच्ची पीजीआई में भर्ती है। उसकी सेहत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। मामले में अगला चरण सोशल बोर्ड के गठन का है। इसमें सोशल वेलफेयर विभाग और प्रशासन की ओर से तय सदस्य शामिल होंगे। बोर्ड बच्चे के पारिवारिक माहौल, सामाजिक पृष्ठभूमि और व्यवहार से जुड़े पहलुओं की पड़ताल करेगा। डॉक्टरों के पैनल ने बच्चे के कुछ परीक्षण भी कराए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जरूरत पड़ने पर बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराकर आगे का आकलन और उपचार किया जा सकता है।