आईडीबीआई बैंक का निजीकरण करने की योजना के खिलाफ मंगलवार को पूरा स्टाफ 31 मार्च तक हड़ताल पर चला गया। सेक्टर-11 स्थित ब्रांच के बाहर बैंक के कर्मचारी एकत्रित होकर मांग रखी। हड़ताल की वजह से पंचकूला स्थित आईडीबीआई बैंक की चारों ब्रांचों में सन्नाटा छाया रहा। स्टाफ और ग्राहकों के बैठने के लिए बैंक परिसर में रखी गईं कुर्सियां खाली दिखीं।
आईडीबीआई बैंक के चंडीगढ़ स्थित जोनल आफिस से ब्रांचों में काम संभालने के लिए वरिष्ठ अधिकारी भेजे गए। इन ब्रांचों में प्रतिदिन करीब साढ़े चार सौ करोड़ रुपये का बिजनेस होता है। जोनल आफिस से आए वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि पंचकूला की चारों ब्रांचों में करीब 40 लोगों का स्टाफ है। इनके हड़ताल पर जाने से वैकल्पिक प्रबंध किया गया है। जिसके कारण बिजनेस पर कोई असर नहीं पड़ा।
आईडीबीआई बैंक की संघर्ष समिति के सदस्य आशुतोष गौड़ ने बताया कि प्रत्येक कर्मचारी अपने बैंक के प्रति समर्पित है, लेकिन केंद्र सरकार आईडीबीआई का निजीकरण करने की जो योजना बनाई है, उसके खिलाफ पूरा स्टाफ लामबद्ध हुआ है। स्टाफ की पहली मांग है कि किसी भी सूरत में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत से कम न हो, दूसरी मांग है कि नवंबर 2012 से अब तक जो सैलरी सेटलमेंट का काम नहीं हुआ इसे जल्द सेटल किया जाए। संघर्षरत बैंक कर्मियों का कहना है कि अगर सरकार दो मांगों को मान लेती है तो काम पर जुट जाएंगे।
बैंक ने ब्रांच पर चस्पा की सूचना
आईडीबीआई बैंक प्रबंधन ने ग्राहकों को स्पष्ट किया है कि हड़ताल के दौरान सामान्य बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती है। लेकिन ग्राहकों की असुविधा को कम करने के लिए बैंक खुले रहेंगे। हड़ताल के दिनों में वैकल्पिक डिलीवरी चैनलों के माध्यम से दी जाने वाली सेवाएं एटीएम, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग आदि सामान्य रूप से उपलब्ध कराई जाएंगी।
...तो उनके साथ धोखा होगा
हड़ताल पर चल रहे आईडीबीआई बैंक के स्टाफ का कहना है कि अगर उनके बैंक का निजीकरण होता है तो उन युवाओं के साथ धोखा होगा, जिन्होंने सरकारी बैंकिंग की परीक्षा उत्तीर्ण कर इसे चुना था। बैंक के निजीकरण का असर उन दिव्यांग कर्मियों पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है। क्योंकि निजीकरण होने पर इन्हें बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है।