पंचकूला। पंचकूला को स्टार रैंकिंग में अधिकारियों की लापरवाही से जीरो नंबर मिला है। अधिकारियों ने अपनी क्षमता से बड़े स्टार के लिए आवेदन कर दिया और नंबर जीरो आ गया। यदि पंचकूला थ्री स्टार के लिए आवेदन करता तो रैंकिंग टू स्टार आ सकती थी। पंचकूला ने पिछली बार थ्री स्टार के लिए आवेदन किया था और उसे टू स्टार मिले थे।
इस बार के रिजल्ट में हरियाणा के केवल दो शहरों को स्टार रेटिंग मिली है। इनमें करनाल को वन स्टार और रोहतक को थ्री स्टार रेटिंग मिली है। पड़ोसी शहर चंडीगढ़ को भी कंपीटिशन में थ्री स्टार की रेटिंग मिली है। गुड़गांव और फरीदाबाद को भी जीरो रेटिंग मिली है। गारबेज फ्री में पंचकूला हरियाणा के करनाल और रोहतक को कड़ी टक्कर देता है। बीते दो साल में शहर को गारबेज फ्री बनाने के लिए काफी इंप्रूवमेंट भी की गई है। इसके बावजूद गलत कैटेगरी में अप्लाई करने का खमियाजा पंचकूला को भुगतना पड़ा है।
पंचकूला ने कंपीटिशन में फाइव स्टार रेटिंग के लिए अप्लाई किया था। फाइव स्टार रैंकिंग हासिल करने के लिए जरूरी शर्तें पूरी न करने के कारण पंचकूला को जीरो रेटिंग मिली है। पंचकूला नगर निगम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा शहर में स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतरीन काम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। डोर टू डोर गारबेज कलेक्शन, सेग्रीगेशन, बल्क बेस्ट जेनरेटर कंप्लाइंस, स्टोरेज बिनस में अच्छे नंबर लिए हैं, लेकिन लिटर बिन लगाने में पंचकूला के नंबर कट गए, जिस कारण स्टार रैंकिंग हासिल नहीं हो पाई।
इससे पहले हुए कंपीटिशन में शहर अपनी मर्जी से किसी भी स्टार रेटिंग के लिए अप्लाई कर सकते थे। हालांकि अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रयास में कोई कमी नहीं थी, उन्होंने दिन-रात मेहनत की। लेकिन एक गलती के कारण नुकसान हो गया। रिजल्ट के दौरान शहरों को उनकी योग्यता के मुताबिक रैंकिंग मिल जाती थी। लेकिन इस बार कंपीटिशन में ऐसा नहीं था। अगर कोई टू या थ्री स्टार रेटिंग के लिए तय शर्तें पूरी करता है तो उसे इस कैटेगरी में ही क्वालीफाई करने के लिए एप्लाई करना था। इस वजह से ही पंचकूला को जीरो रैंकिंग मिली है।