मानसून की मंगलवार को हुई पहली बारिश से हुडा के दावों की पोल खुल चुकी है। एक घंटे हुई बारिश से ही सड़कों पर जलभराव की स्थिति बनी थी। इतना ही नहीं ड्रेनेज सिस्टम ठीक से काम न करने की वजह से बरसाती पानी लोगों के घरों में भी घुस गया था। इसके बाद भी हुडा ने सबक नहीं ली। यही कारण है कि सफाई कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी को ईमानदारी से नहीं निभा रहे हैं। वह सड़कों की सफाई करके कूड़ों के छोटे-छोटे ढेर सड़कों के किनारे लगा देते हैं, जो बारिश होने पर पानी के साथ बहकर ड्रेनेज सिस्टम को ब्लॉक कर देते हैं। ड्रेनेज सिस्टम ब्लाक होने से बरसाती पानी सड़कों और सेक्टरों में जमा हो जाता है। इतना ही नहीं अधिक बारिश होने पर यह पानी लोगों के घरों में भी घुस जाता है।
नींद से अब जागा हुडा
लोगों की लगातार शिकायत के बाद हुडा की नींद खुली है। हुडा अधिकारियों ने इस समस्या को गंभीरता से लिया है और ड्रेेनेज सिस्टम की सफाई का काम शुरू करवाया दिया है। हुडा के कर्मचारियों ने वीरवार को इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और सेक्टर 14 डिवाइडिंग, सेक्टर 14 और 15 की डिवाइडिंग, इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 और सेक्टर 15 की डिवाइडिंग, इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 और सेक्टर 16 की डिवाइडिंग एवं फेज-1 और 2 की डिवाइडिंग पर बनी रोडगली की सफाई की।
कर्मचारी बरत रहे हैं लापरवाही
हुडा के कर्मचारियों द्वारा सफाई करने में भी लापरवाही बरती जा रही है। सुबह नौ बजे कर्मचारी रोडगली की सफाई करते हुए नजर आए। लेकिन उन्होंने ड्रेनेज सिस्टम से कचरा निकालकर सड़क के किनारे लगा दिए। जिसे किसी भी कर्मचारी ने उठाने की जहमत नहीं उठाई। यह कचरे के ढेर वीरवार शाम तक सड़कों पर ही पड़े रहे। यदि इन कचरों नहीं उठाया गया तो बारिश होते ही यह फिर ड्रेनेज सिस्टम को ब्लॉक कर देंगे।
बॉक्स
लाखों की लागत से बना नाला नहीं आता काम
शहर से बारिश के पानी की निकासी के लिए सेक्टर 16 से इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 तक लाखों की लागत से बरसाती नाला बनाया गया है। इस नाले में पूरे शहर की रोडगली से होते हुए बारिश का पानी जाता है। लेकिन रोडगली में कचरा जमा होने के कारण बारिश का पानी नाले तक नहीं पहुंच पाता है और सड़कों पर जलभराव हो जाता है।
कोट्स
सेक्टर 17 रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान महेश नैन का कहना है कि हुडा विभाग द्वारा बरती जा लापरवाही के कारण लोगों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। हुडा द्वारा यदि रोडगली की सफाई की जाती है तो कचरे को उठाकर डंपिंग ग्राउंड में डलवाना चाहिए, ताकि रोडगली जाम न हो और लोगों को परेशानियों से न जूझना पड़े।
सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान एसके नैय्यर का कहना है कि हुडा द्वारा वैसे तो रोडगली की सफाई नहीं की जाती है। लेकिन जब मानसून शुरू हो जाता है और सड़कों पर जलभराव होता है तब हुडा की नींद खुलती है।
रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन सेक्टर 17 के महासचिव कृष्ण गोयल का कहना है कि बारिश के पानी की निकासी न होने से लोगों के घरों में पानी घूस जाता है। इससे कई लोगों के घरों का सामान भी बर्बाद होता है। बावजूद इसके हुडा लोगों की समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं देता है।
कोट्स
जहां पर भी रोडगली की सफाई की जाती है वहां से तीन या चार दिन बाद कचरा उठाया जाता है। सफाई करते वक्त कचरा गीला होता है, जिस वजह से कचरा उठाना मुश्किल होता है। तीन-चार दिन तक कचरा सूखने के बाद उसे उठाया जाता है। इसके अलावा हमारे पास कोई और विकल्प नहीं है। हमारी तरफ से पूरे प्रयास किए जा रहे हैं कि कहीं भी जलभराव न हो।
केएस अहलावत, हुडा एक्सईएन