चंडीगढ़। 16 साल से आउटसोर्स आधार पर कार्यरत चौकीदारों को बड़ी राहत देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को छह सप्ताह के भीतर उनकी सेवाएं नियमित करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि तय समय में आदेश का पालन नहीं हुआ तो कर्मचारियों को नियमित माना जाएगा। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने पांच याचिकाओं का निस्तारण करते हुए यह फैसला सुनाया है।
याचिकाकर्ता वर्ष 2008 से विभिन्न विभागों में आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से चौकीदार के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने समान कार्य के लिए समान वेतन, न्यूनतम वेतन व महंगाई भत्ता और सेवाओं के नियमितीकरण की मांग की थी। 15 अक्तूबर 2020 को नियमितीकरण संबंधी उनकी मांग को अस्वीकार कर दिया गया था जिसे याचिका में चुनौती दी गई।
हाईकोर्ट को बताया गया कि विभाग ठेकेदारों को 14 हजार रुपये प्रति कर्मचारी भुगतान करता था लेकिन उन्हें केवल 8500 रुपये प्रतिमाह ही मिलते थे। ऐसे में वे राज्य द्वारा तय किए गए न्यूनतम वेतन से भी वंचित थे। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता कई वर्षों से सेवा दे रहे हैं। वे न तो पार्ट-टाइम हैं और न ही आकस्मिक कर्मचारी। उनका कार्य विभाग के लिए स्थायी और अनिवार्य प्रकृति का है। उन्हें न्यूनतम वेतन व महंगाई भत्ता नहीं दिया जा रहा था।
हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार एक सांविधानिक नियोक्ता है और वह वर्षों तक अस्थायी लेबल लगाकर कर्मचारियों का शोषण नहीं कर सकती। लंबे समय तक अस्थायी आधार पर काम करवाना जबकि काम स्थायी प्रकृति का हो, अनुचित श्रम व्यवहार है और यह संविधान के अनुच्छेद 14, 16 व 21 का उल्लंघन है। राज्य एक मॉडल एम्प्लॉयर है और वह बजट का संतुलन कर्मचारियों की कीमत पर नहीं कर सकता। वर्षों तक अस्थायी तौर पर सेवा लेने के बाद नियमितीकरण से इन्कार करना न्यायसंगत नहीं है।