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Panchkula News: वकील पर पुलिसिया जुल्म के खिलाफ विपक्ष लामबंद

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चंडीगढ़। पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब में एक वकील जो अपने मुवक्किल के साथ पुलिस स्टेशन गए थे, पर पुलिस द्वारा अमानवीय अत्याचार किए जाने का मामला तूल पकड़ने लगा है। एक तरफ जहां पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वकील अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं वहीं पंजाब के सियासी दल भी इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ लामबंद हो गए हैं। मंगलवार को पंजाब भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने इस मामले पर अलग-अलग प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर घटना की कड़े शब्दों में निंदा की। पंजाब भाजपा ने जहां दोषी पुलिस वालों को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की वहीं शिअद ने इस मामले की जांच हाईकोर्ट की निगरानी में सीबीआई से कराने की मांग करते हुए राज्य के गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की।
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चंडीगढ़ सेक्टर-37 स्थित पंजाब भाजपा मुख्यालय में मंगलवार को पार्टी के लीगल सेल के संयोजक एडवोकेट एनके वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मांग उठाई कि आरोपी पुलिस अधिकारियों को तुरंत बर्खास्त करके गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम को देखते हुए सीजेएम श्री मुक्तसर साहिब के आदेश पर दर्ज की गई एफआईआर में 377, 342, 323, 149, 506 आईपीसी सहित अन्य संबंधित धाराएं जोड़ी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस मामले में शामिल और पुलिस अधिकारियों को एफआईआर में नामजद करके तुरंत गिरफ्तार किया जाए। यह घटना आप सरकार में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को दर्शाती है। मुख्यमंत्री भगवंत मान पंजाब के वकीलों से माफी मांगें, अन्यथा पंजाब के वकील मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। इस मौके पर राम बिलास गुप्ता, सुरिंदर टीना, नितेश सिंघी, हरिंदर पाल, सह संयोजक, सुभाष जिंदल और चरणजीत जागड़ा एडवोकेट उपस्थित थे।
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उधर, सेक्टर-28 स्थित शिअद मुख्यालय में मंगलवार को पार्टी के सीनियर नेता डाॅ. दलजीत सिंह चीमा ने पूरे मामले की जांच हाईकोर्ट की निगरानी में सीबीआई से कराने की मांग की। उन्होंने श्री मुक्तसर साहिब में वकील पर अत्याचार और अमानवीय व्यवहार के आरोपी पुलिसकर्मियों और मुक्तसर के एसएसपी को निलंबित करने के साथ ही सभी आरोपियों को बर्खास्त कर गिरफ्तार करने की मांग की। प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए डाॅ. चीमा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की भी मांग की जोकि राज्य के गृहमंत्री हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मान गृहमंत्री के रूप में अपने कर्तव्य के पालन में विफल रहे हैं और उन्हें अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि मुक्तसर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के स्पष्ट आदेश के बावजूद एफआईआर दर्ज करने में देरी को लेकर पुलिस के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई? पंजाब पुलिस कर्मियों द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन का यह एकमात्र मामला नहीं है, इससे पहले जालंधर में ढिल्लों भाइयों के खिलाफ पुलिस बर्बरता ने उन्हें ब्यास नदी में कूदने को मजबूर कर दिया था और जिसके कारण एक भाई की मृत्यु हो गई और दूसरे भाई का अभी तक पता नहीं लगा है।
इस मौके पर शिअद के लीगल सेल के अध्यक्ष अर्शदीप सिंह कलेर ने मुक्तसर के एसएसपी की आलोचना करते हुए कहा कि एसएसपी ने कई दिन तक आरोपियों को पनाह दी, जब तक कि अदालत ने मामले में हस्तक्षेप नहीं किया। भले ही पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश में वकील अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं, लेकिन पंजाब के मुख्यमंत्री ने मामले में न्याय सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप नहीं किया है।
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