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ओपीडी खुली, स्पेशल फ्लू वार्ड में 250 की हुई जांच

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पंचकूला सेक्टर 6 सिविल अस्पताल मे फ्लू टेस्ट के लिए सोशल डिस्टेंसिंग में बैठकर इंतजार करते लोग। - फोटो : PKL OFFICE
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पंचकूला। पंचकूला सिविल अस्पताल में लॉकडाउन 3 में ढील मिलने के बाद ओपीडी शुरू कर दी गई है। पंचकूला में कोरोना संक्रमण के केस नहीं आने के बाद यह फैसला लिया गया है। इससे मरीजों को काफी राहत मिली है। वीरवार को सिविल अस्पताल के स्पेशल फ्लू वार्ड में 250 लोगों की जांच की गई। यह जांच पंचकूला से बाहर जाने वाले लोगों की की गई। इनके सैंपल लिए गए हैं। इनकी कोरोना वायरस की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद इन्हें बाहरी राज्यों में जाने की इजाजत दी जाएगी। इसकी पुष्टि पंचकूला सिविल अस्पताल की सीएमओ डॉ. जसजीत कौर ने की है।
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डॉक्टर जसजीत कौर ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से लॉकडाउन में लोगों को घर भेजने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए लगाए गए लॉकडाउन के कारण शहर के अस्पतालों में ओपीडी में आने वाले मरीजों का भी इलाज नहीं हो पा रहा था। अब जब प्रशासन ने लॉकडाउन में कई तरह की राहत दे दी है तो ओपीडी को खोल दिया गया है। शहर में वीरवार से सेक्टर-6 के सिविल अस्पताल में सभी डिपार्टमेंट की ओपीडी शुरू कर दी गईं। पहले दिन रजिस्ट्रेशन के लिए मरीजों को काफी देर इंतजार करना पड़ा, जिसके बाद उन्हें सैनिटाइज किया गया और उनका टेंपरेचर चेक करने के बाद ही रजिस्ट्रेशन के लिए भेजा गया।
गर्भवती महिलाओं ने कराया चेकअप
आज सबसे ज्यादा मरीजों की भीड़ गायनी ओपीडी में देखने को मिली, जहां पर गर्भवती महिलाओं ने चेकअप करवाया। इसके अलावा फ्लू वार्ड में मरीजों की सबसे ज्यादा भीड़ देखने को मिली। हालात ये थे कि मरीजों को अपना चेकअप करवाने के लिए जमीन पर बैठकर इंतजार करना पड़ा।
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टेंट लगवाया गया
सुबह 8:00 से लेकर 11:00 तक 50 से ज्यादा मरीज रजिस्टर्ड हो चुके थे। ज्यादातर मरीजों को ब्लड सैंपल टेस्ट करवाने के लिए डॉक्टरों ने कहा, जिसके बाद लैब में भी मरीजों की भीड़ देखने को मिली। वीरवार को शुरू हुई ओपीडी में चेकअप के लिए आने वाले मरीजों के लिए अस्पताल प्रबंधन की ओर से बिल्डिंग के बाहर टेंट भी लगाया गया, जहां पर मरीजों को इंतजार करने के लिए बैठाया गया था।
5-5 मरीजों को भेजा जा रहा था ओपीडी में
फ्लू वार्ड और अस्पताल की दूसरी ओपीडी में चेकअप करवाने के लिए काफी मरीज अस्पताल पहुंचे। ऐसे में मरीजों की भीड़ को कंट्रोल करने के लिए 5-5 मरीजों की रजिस्ट्रेशन की जा रही थी। इसके बाद हर ओपीडी में सोशल डिस्टेंसिंग फॉलो करने के लिए सिर्फ दो या तीन मरीजों को ही डॉक्टर रूम में भेजा जा रहा था।
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