चंडीगढ़। पंजाब में लगातार बढ़ते अवैध खनन के लिए अधिकारियों की चूक जिम्मेदार है। यह खुलासा अवैध खनन को लेकर लंबित याचिका में पंजाब सरकार की ओर से दाखिल जवाब में हुआ है। चौकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि पिछले 10 साल में अवैध खनन के 797 आरोपी बरी हुए हैं और केवल दो जांच अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है। रोपड़ में अवैध खनन के मामले में कुलवीर सिंह ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने बढ़ते खनन मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब सरकार को जमकर फटकार लगाई थी और अवैध खनन की जमीनी स्तर पर जांच के लिए कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया था। कोर्ट को बताया गया था कि गत वर्ष अवैध खनन की 118 एफआईआर दर्ज की गईं थीं। इस स्थिति पर हाईकोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि अवैध खनन को रोकना बेहद जरूरी है। ऐसे में पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को आदेश दिया था कि पिछले 10 साल में अवैध खनन के दर्ज मामलों का ब्योरा पेश किया जाए।
आदेश के अनुसार पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि पिछले दस साल में अवैध खनन के 797 आरोपी बरी हो गए। गृह सचिव ने कोर्ट में यह जानकारी नहीं दी कि पिछले दस साल में कितने मामले दर्ज हुए हैं। गृह सचिव ने अपने हलफनामे में कोर्ट को बताया गया कि 2016 में सरकार ने आदेश जारी किया था कि अगर खनन मामले में आरोपी बरी होता है तो जांच अधिकारी के खिलाफ विभाग की स्टैंडिंग कमेटी कार्रवाई करेगी। हैरान करने वाली बात यह है कि 797 आरोपी बरी होने के बावजूद स्टैंडिंग कमेटी ने केवल दो जांच अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है, बाकी 795 मामले में कुछ कार्रवाई नहीं की गई। साथ ही हलफनामे में एक रोचक बात यह भी बताई गई कि जिन मामलों में आरोपी बरी होते हैं, उनकी जानकारी स्टैंडिंग कमेटी को नहीं दी जा रही जिस कारण जांच अधिकारी बच जाते हैं।
अब अप्रैल 2024 में सरकार ने आदेश जारी कर निर्णय लिया है कि अगर जांच अधिकारी के खिलाफ स्टैंडिंग कमेटी कार्रवाई नहीं करती है तो स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद मामले की सुनवाई जुलाई तक स्थगित कर दी।