हरियाणा वित्त विभाग में हुए मुख्य लेखा अधिकारियों के तबादलों में एक बार फिर से लंबे समय से एक ही विभाग में जमे कई अधिकारी बच गए हैं। वर्षों से एक ही कार्यालय में तैनात अधिकतर अधिकारी नहीं बदले गए हैं। 22 मुख्य लेखा अधिकारियों के सोमवार को तबादले हुए, लेकिन छह को उसी विभाग में दोबारा से नियुक्ति दे दी गई। ये इस विभाग में ही लंबे समय से सेवारत हैं।
शिक्षा विभाग में 400 करोड़ रुपये का एरियर घोटाला सामने आने के बाद वित्त विभाग ने 250 मुख्य लेखा अधिकारियों, वरिष्ठ लेखा अधिकारियों की सूची तबादलों के लिए तैयार की थी। इनमें से गड़बड़ी में संलिप्त कई अधिकारियों के सर्विस रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई थी। दिसंबर माह में वित्त विभाग ने लगभग 50 मुख्य लेखा अधिकारियों के तबादलों को लेकर सूची तैयार की थी और सीएमओ के पास भेजी थी। इनमें से 15 अधिकारी ऐसे थे, जो लंबे समय से एक ही कार्यालय में कई साल से बैठे हैं। लेकिन तबादलों में कई अधिकारी पूरी तरह से खुद को बचाने में कामयाब रहे। बदले गए अधिकतर मुख्य लेखा अधिकारी भी अच्छी पोस्टिंग पाने में सफल रहे हैं, 4 को ही एक से दूसरे जिले में भेजा गया है।
चंडीगढ़ में तैनात मुख्य लेखा अधिकारी ज्यादा से ज्यादा पंचकूला ट्रांसफर हुए हैं। कुछ ने पंचकूला में ही दूसरे विभाग में नियुक्ति ले ली है। जिलों में तैनात कुछ अधिकारियों ने उसी जिले में तबादला लिया है। लंबे समय से एक स्थान पर जमे व वित्तीय अनियमितताओं के आरोप झेल रहे अधिकारियों का मामला मुख्यमंत्री मनोहर लाल के संज्ञान में भी था। क्योंकि खुद मुख्यमंत्री के पास ही वित्त विभाग है, बावजूद इसके लंबे समय से एक ही सीट पर जमे अधिकारियों के तबादले नहीं होना सवाल खड़े करता है।
फिर समान विभाग में पोस्टिंग देने पर उठे सवाल
सोमवार को हुए तबादलों के बाद वित्त विभाग में नई चर्चा छिड़ गई है। कुछ अधिकारियों को फिर समान विभाग में पोस्टिंग देने पर सवाल उठ रहे हैं। मुख्य लेखा अधिकारी राजेश मिगलानी, अरुण कुमार, कमल कांत बिजोरिया, राजपाल, नैन सिंह, धर्मपाल को समान विभाग में नियुक्ति दी गई है, जिसका अंदरखाने विरोध शुरू हो गया है। इसी प्रकार, एक सीट पर लंबे समय तक जमे रहने वाले अधिकारियों की सूची में शामिल मुख्य लेखा अधिकारी राजेश कुमार बंसल, विजय कुमार चावला, मिथलेस कुमार, राकेश कुमार, पवन कुमार को तबादला लिस्ट से बाहर निकाल दिया गया है।