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Panchkula News: कुपोषितों के लिए संजीवनी बना सिविल अस्पताल का पोषण पुनर्वास केंद्र

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पंचकूला। शहर के सिविल अस्पताल सेक्टर-6 में चल रहा पोषण पुनर्वास केंद्र कुपोषित बच्चों के लिए वरदान साबित हो रहा है। अब तक इस केंद्र में 8्र00 से अधिक बच्चों को नया जीवन मिल चुका है। अप्रैल 2024 से दिसंबर 2024 तक 150 बच्चों को स्वस्थ किया गया। इस साल इस दौरान यहां 160 बच्चों को दाखिल किया गया। चार बच्चों को यहां से पीजीआई रेफर किया गया। पांच साल में पोषण पुनर्वास केंद्र का डेथ रेशो शून्य है।
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पीएमओ डॉ. रीटा कालरा ने बताया कि डॉक्टरों की टीम और छह नर्सिंग ऑफिसर की देखरेख में कुपोषित बच्चों को नया जीवन दिया जा रहा है। जिले में कुपोषित बच्चों को तलाश कर उन्हें जिला अस्पताल में भेजने का जिम्मा आशा कार्यकर्ताओं पर है। महिला एवं बाल विकास विभाग की आंगनबाड़ी वर्कर व स्वास्थ्य विभाग की आशा वर्कर अभिभावकों को कुपोषण के शिकार बच्चों को एनआरसी में पहुंचाने के लिए प्रेरित करती हैं। इनमें कुपोषित (मैम) व अतिकुपोषित (सैम) बच्चे शामिल रहते हैं।

अति कुपाेषित बच्चों को करते हैं इलाज
पंचकूला के बाल रोग विशेषज्ञ गगन ने बताया कि पोषण पुनर्वास केंद्र में छह माह से पांच वर्ष आयु तक के कुपोषित, अति-कुपोषित बच्चों को इलाज के लिए भर्ती किया जाता है। इलाज पौष्टिक आहार मिलता है। केंद्र सातों दिन 24 घंटे खुलता है। बच्चे के साथ एक अभिभावक रहेगा। कुपोषण चिंता का बड़ा विषय है। सरकार इसको लेकर गंभीर है। इसलिए समय समय पर जिले में इसको लेकर कैंप भी लगाए जाते हैं। बच्चे के साथ अस्पताल में रहने वाली माता को प्रतिदिन 100 रुपये भत्ता भी दिया जाता है। एनसीआर में कुपोषित बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य देने का प्रयास है। कोई बच्चा कुपोषण की श्रेणी में है तो उसे पोेषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराना चाहिए। इसमें बच्चों की डाइट भी दी जाती है।
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अस्पताल लेकर आने के बाद बच्चे को राहत
रायपुररानी की रहने वाली नताशा ने बताया कि उनका बच्चा बीमार हुआ। इसके बाद जांच कराई। इसके बाद उसे पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया गया। इलाज के बाद उसे राहत मिली। 15 दिन इलाज और अच्छी डाइट के बाद उसका वजन बढ़ गया है और वह अब स्वस्थ है। इसके पहले वह कमजोर था। वहीं बरवाला, कालका सहित अन्य क्षेत्रों से इलाज कराने आए बच्चों को राहत मिली।


पोषण पुनर्वास केंद्र में पहचान कर बच्चों का इलाज किया जाता है। हर महीने से 20 से ज्यादा बच्चों को इलाज कर कुपोषण से बचाया जाता है और लोगों को बच्चों को कुपोषण से बचाने की ट्रेनिंग दी जाती है। -डॉ. रीटा कालरा, पीएमओ, पंचकूला सिविल अस्प्ताल सेक्टर -6

आकाश सक्सेना

आकाश सक्सेना

आकाश सक्सेना

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