चंडीगढ़। राज्य के खेल स्टेडियम व अकादमियां अब ओलंपियन के नाम से जानी जाएगी। राज्य सरकार ने ओलंपियन को सम्मान देने और युवाओं को खेलों से जोड़ने के लिए इस दिशा में कदम बढ़ाया है। पहले चरण में गुरदासपुर में 13 ओलंपियन खिलाड़ियों, मोहाली में एक स्टेडियम और जालंधर में नाम बदले गए हैं। उम्मीद है कि आने वाले समय में इसे अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा। राज्य सरकार ने जिला स्तर पर ओलंपियनों की पहचान के लिए एक कमेटी का गठन किया है जो कि अपने स्तर पर काम कर रही है। 1976 के मॉन्ट्रियल ओलंपिक में सुरजीत सिंह रंधावा को सर्वसम्मति से दुनिया के सर्वश्रेष्ठ डिफेंडर के रूप में घोषित किया गया था। जालंधर में एक हॉकी स्टेडियम का नाम उनके नाम पर रखा गया है। वहां प्रतिवर्ष एक लोकप्रिय टूर्नामेंट भी आयोजित किया जाता है।
उसी शहर में पंजाब सरकार युवाओं के लिए सफल सुरजीत अकादमी चलाती है। सुरजीत सिंह बटाला के पास दखला गांव के रहने वाले थे। कुछ खेल प्रेमियों ने बटाला शहर के मुख्य मार्गों में से एक में खिलाड़ी की प्रतिमा स्थापित की थी। इसके अलावा मोहाली में हॉकी स्टेडियम का नाम बलबीर सिंह सीनियर के नाम पर रखा गया है।
स्टेडियम नहीं तो खेल मैदान का रखेंगे नाम
राज्य सरकार के अधिकारियों का कहना है कि स्टेडियम का नाम ओलंपियन पर रखने की प्रक्रिया बहुत जटिल है। कई तरह की मंजूरियां लेनी पड़ती हैं लेकिन जहां पर स्टेडियम नहीं बन सकते हैं, वहां खेल के मैदानों का नाम इन खिलाड़ियों पर रखा जाएगा। इससे पहले महत्वपूर्ण सड़कों और गलियों के नामकरण का प्रस्ताव था लेकिन इसे मंजूरी नहीं मिल पाई थी।