पंचकूला। करीब 12 साल पुराने 320 वर्ग गज जमीन विवाद में तारा देवी और सुदेश रानी को अदालत से राहत नहीं मिली। अदालत ने 21 अक्टूबर 2026 को दोनों महिलाओं की समीक्षा याचिका खारिज करते हुए जैनेंद्र गुरुकुल सोसायटी के पक्ष में पहले दिए गए फैसले को बरकरार रखा।
सोसायटी ने जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप लगाते हुए कब्जा दिलाने और तीन जुलाई 2011 से कब्जा मिलने तक पांच हजार रुपये प्रतिमाह हर्जाना देने की मांग की थी।
निचली अदालत ने 30 मई 2017 को सोसायटी का मुकदमा खारिज कर दिया था। इसके बाद अपील पर 15 मार्च 2022 को तत्कालीन जिला न्यायाधीश ने सोसायटी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए जमीन का कब्जा दिलाने का आदेश दिया। साथ ही पांच हजार रुपये मासिक हर्जाना और मुकदमा दायर करने की तारीख से भुगतान तक छह प्रतिशत सालाना ब्याज देने का निर्देश दिया।
महिलाओं ने फैसले की समीक्षा की मांग करते हुए दलील दी कि कब्जे का मुकदमा पहले ही खारिज किया जाना चाहिए था। हालांकि, अदालत को पुराने फैसले में ऐसी कोई स्पष्ट त्रुटि नहीं मिली, जिसके आधार पर समीक्षा की जा सके। इससे पहले पांच लाख रुपये जमा कराने के आदेश को महिलाओं ने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली।