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Panchkula News: उम्रकैद कैदी को समयपूर्व रिहाई नहीं, पंजाब सरकार पर 25 हजार जुर्माना

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कैदी की मांग अस्वीकार करते हुए नहीं दर्ज किया था ठोस कारण
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तय प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए हाईकोर्ट ने निर्णय किया खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी की समयपूर्व रिहाई की याचिका बिना किसी ठोस कारण बताए खारिज करने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने आदेश को तय प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए आवेदन पर नए सिर से विचार करने का आदेश दिया है।
जस्टिस सुमित गोयल ने कहा कि संबंधित प्राधिकारी ने 17 दिसंबर 2024 को पारित आदेश में न तो वस्तुगत आधार पर विचार किया और न ही कोई तर्कसंगत कारण दर्ज किया। राज्य का यह मानना कि समयपूर्व रिहाई केवल व्यक्तिगत संतुष्टि पर निर्भर करती है, गलत और अस्वीकार्य है। जेल प्रशासन ने 27 मई 2022 को नवांशहर निवासी कैदी की फाइल रिहाई के लिए शुरू की थी लेकिन लगभग डेढ़ साल बाद 8 दिसंबर 2023 को यह मामला सक्षम प्राधिकारी तक पहुंच सका।
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कोर्ट ने इसे राज्य के अधिकारियों की लापरवाह और ढीली प्रशासनिक कार्यप्रणाली बताया। न्यायालय ने कहा कि पंजाब सरकार की 2017 की समयपूर्व रिहाई नीति स्पष्ट मानदंड तय करती है कि कैदी की पात्रता पूरी होने पर उसका मामला स्वतः विचार के लिए भेजा जाए। इसके लिए कैदी की ओर से याचिका देना आवश्यक नहीं है। 17 दिसंबर 2024 का आदेश किसी भी प्रकार से विस्तृत नहीं कहा जा सकता क्योंकि उसमें यह नहीं बताया गया कि कैदी की रिहाई को अस्वीकार करने के क्या ठोस कारण थे।
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न्यायमूर्ति गोयल ने कहा कि अधिकारियों की सुस्ती और जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए न्यायालयों को संस्थागत स्तर पर सख्त रुख अपनाना होगा। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार का 17 दिसंबर 2024 का आदेश रद्द करते हुए मामले को पुनर्विचार के लिए राज्य प्राधिकारियों को वापस भेज दिया। साथ ही निर्देश दिया कि चार सप्ताह के भीतर, कानून के अनुसार, एक नया कारणयुक्त और तर्कसंगत आदेश पारित किया जाए।
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