चंडीगढ़। मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसे व्यवसायी चुन्नी लाल गाबा की जमानत याचिका पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में एक वर्ष से सुनवाई नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि यह जानकर उन्हें बड़ा झटका लगा है कि एक वर्ष से आरोपी की जमानत याचिका लिस्ट ही नहीं है। लिहाजा सुप्रीम कोर्ट ने अब हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को गाबा की जमानत पर जल्द सुनवाई करने के लिए व्यवस्था करने के आदेश दे दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस हेमंत गुप्ता एवं जस्टिस वी सुब्रह्मण्यम की खंडपीठ ने यह आदेश गाबा द्वारा सीनियर एडवोकेट विक्रम चौधरी के जरिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए हैं। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उनके खिलाफ ईडी द्वारा दर्ज मामले में उनकी जमानत याचिका पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में विचाराधीन है। गत वर्ष महीने में कोरोना के कारण हाईकोर्ट ने सभी याचिकाओं पर सुनवाई स्थगित कर दी थी और सिर्फ जरूरी केसों पर सुनवाई किया जाना तय किया था। एक वर्ष से उनकी इस जमानत याचिका पर सुनवाई नहीं हुई है, ऐसे में उनकी जमानत याचिका पर जल्द सुनवाई किए जाने के आदेश दिए जाएं।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि वैसे तो सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट अंतरिम आदेशों में दखल देना सही नहीं समझता है, लेकिन उन्हें इस जानकारी से बड़ा झटका लगा है कि याचिकाकर्ता की जमानत याचिका पर एक वर्ष से सुनवाई ही नहीं हुई है। जमानत याचिका पर सुनवाई किया जाना आरोपी का अधिकार है, लेकिन जमानत याचिका पर सुनवाई ही नहीं करने से उसके अधिकारों का हनन हुआ है। लिहाजा सुप्रीम कोर्ट ने अब पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को याचिकाकर्ता की जमानत पर जल्द सुनवाई किए जाने की व्यवस्था करने के आदेश दे दिए हैं।