सड़कों पर घूमते लावारिस पशुओं पर निगम की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अमर उजाला टीम की ओर से शहर की सड़कों का दौरा करने के दौरान यह स्थिति सामने आई। इस दौरान सड़कों पर दुपहिया और चौपहिया से सफर करने वाले लोग सुरक्षित नहीं हैं। निगम की ओर से कोर्ट में आठ बार सुनवाई होने के बाद भी जवाब दाखिल नहीं किया गया है। लावारिस पशुओं को रखने के लिए कोई पुख्ता प्लान नहीं है।
रविवार को भी शहर के सेक्टर -15, इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और 2 पर पशु घूमते हुए दिखाई दिए हैं। शहर की कई सड़कों पर लावारिस पशु खड़े मिले। घग्गर पार के सभी सेक्टरों के अलावा सेक्टर-2, 4, 11, 15, 16, 17, 18 और 19 में सड़कों पर लावारिस पशु घूमते रहते हैं। पशुपालन विभाग की ओर से 2018 के अंत में शहर में किए गए सर्वे के मुताबिक 764 के करीब लावारिस पशु होने का डाटा दिया गया था। आंकड़ों के मुताबिक पिछले करीब एक साल में लावारिस पशुओं की वजह से शहर में अलग-अलग जगह पर 10 हादसे हो चुके हैं और उसमें दो लोगों की जान जा चुकी है। बावजूद इसके नगर निगम व जिला प्रशासन के अधिकारी खामोश बैठे हुए हैं।
मुख्यमंत्री के दावे रहे फेल
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 15 अगस्त 2018 और 26 जनवरी 2019 को शहर को कैटल फ्री बनाने की घोषणा की थी। लेकिन कुछ नहीं हुआ। सुखदर्शनपुर में एक हजार पशुओं वाली क्षमता की गौशाला नहीं बनाई गई है। अब तक इस गौशाला का काम सिर्फ 20 फीसदी ही पूरा हो सका है।
हम लावारिस पशुओं को रखने के लिए जल्द ही गौशालाओं केे निर्माण करवाएंगे। जो भी पशु हैं इन्हें पकड़ने के लिए पूरा प्लान तैयार करेंगे। नगर निगम की ओर से पूरी तैयारी की जा रही है ताकि मेन सड़कों पर पशु न घूमें।
- राजेश जोगपाल, कमिश्नर, नगर निगम, पंचकूला।