पंजाब सरकार ने सूबे के लिए गठित वेतन आयोग को खुद ही दरकिनार करते हुए फैसला लिया है कि अब राज्य में होने वाली भर्तियां केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित पे-स्केल के अनुसार की जाएगी। इस संबंध में शुक्रवार को वित्त परसोनल द्वारा सभी विभाग प्रमुखों को पत्र भेजकर सरकार के फैसले की जानकारी दे दी गई है।
हालांकि इस फैसले से पंजाब में अब नई नियुक्तियां सातवें वेतन आयोग के तहत होंगी, लेकिन इसके बाद भी नए भर्ती होने वाले कर्मचारियों को पंजाब सरकार के मौजूदा वेतनमान के मुकाबले कम वेतन ही मिलेगा। इस बीच राज्य के सेहत विभाग द्वारा इसी हफ्ते शुरू की गई भरती केंद्रीय वेतनमान के अनुसार की जा रही है।
वित्त विभाग के वित्त परसोनल शाखा-1 द्वारा विभाग प्रमुखों को भेजे गए पत्र में, अस्थायी पदों, रिक्त पदों के विरुद्ध भर्ती और पदों के पुनरुद्धार के संबंध में वित्त विभाग द्वारा पहले से जारी निर्देशों की निरंतरता का हवाला देते हुए कहा गया है कि पंजाब सरकार ने सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद, अब यह फैसला किया है कि सभी संभावित भर्तियों / नियुक्तियों के लिए स्वीकार्य वेतनमान / सरकार के किसी भी प्रशासनिक विभाग के कैडर में अनुकंपा नियुक्ति या इसके तहत - सीधी भर्तियां, भारत सरकार द्वारा अधिसूचित 7वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार होंगी।
पत्र में आगे कहा गया है कि प्रशासनिक विभाग, वित्त विभाग के परामर्श से अपने प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन संस्थानों अर्थात सार्वजनिक क्षेत्र के सभी उपक्रमों, बोर्डों, निगमों, एजेंसियों व सहकारी समितियों, पंचायती राज संस्थानों व शहरी स्थानीय निकायों आदि में नई भरती के दौरान केंद्रीय वेतनमान लागू करेंगे।
सरकार के फैसले का विरोध
पंजाब सरकार द्वारा सेहत विभाग और अन्य विभागों में की जा रही नई भर्ती केंद्रीय वेतनमान के आधार पर करने और अन्य विभागों में भी कोविड-19 के नई हिदायतों का पंजाब और यूटी कर्मचारी पेंशनरों के सांझा मोर्चे ने विरोध किया है। सांझा मोर्चा के संयोजक मेघ सिंह सिद्धू, सज्जन सिंह, बख्शीश सिंह, सतीश राणा, प्रेम सागर शर्मा, ठाकुर सिंह, करम सिंह धनोआ, अविनाश शर्मा और धनवंत भट्टल ने कहा है कि सरकार कोविड-19 का अनुचित लाभ उठाकर कर्मचारियों का शोषण करने पर उतर आई है।
उन्होंने कहा कि एक ओर पंजाब सरकार के कर्मचारी कोविड-19 महामारी में अपनी जान की परवाह किए बिना अग्रिम पंक्ति में निस्वार्थ सेवा कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर, स्वास्थ्य विभाग में पंजाब सरकार द्वारा की जा रही नई भर्ती केंद्रीय वेतनमान पर करके कोरोना योद्धाओं के हौसले पस्त किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार की सोच इतनी गिर गई है कि सरकार अपने खर्च को कम नहीं कर रही, बल्कि कर्मचारियों का गला घोंट रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने हाल ही में करण अवतार सिंह को जल नियामक आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया है और उन्हें मुख्य न्यायाधीश के समान वेतन और अन्य लाभ दिए हैं। सरकार ने हाल ही में अपने चहेतों के लिए लग्जरी वाहन भी खरीदे हैं। वहीं, कर्मचारियों के डीए की किस्तों, डीए का बकाया, छठा वेतन आयोग, वृद्धावस्था पेंशन योजना और कच्चे कर्मचारियों को वापस लेने जैसी मांगें सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दी हैं।