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Panchkula News: पानी के लिए 3 फरवरी से किसान संगठनों का पक्का मोर्चा टला

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चंडीगढ़। पंजाब का पानी बचाने के लिए आगामी 3 फरवरी से किसान संगठनों द्वारा चंडीगढ़ में प्रस्तावित पक्का मोर्चा टल गया है। राज्य के पांच किसान संगठनों ने मंगलवार को चंडीगढ़ में बैठक कर इसे फिलहाल टालने का एलान किया। वहीं, किसान संगठनों ने जेलों में बंद सिखों को रिहा करने की मांग रखी। सजा पूरी कर चुके बंदी सिखों को रिहा न करने पर किसान नेताओं ने केंद्र की भाजपा सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन का आरोप लगाया है। मंगलवार को चंडीगढ़ के किसान भवन में पांच किसान संगठनों-भारतीय किसान यूनियन राजेवाल, ऑल इंडिया किसान फेडरेशन, किसान संघर्ष कमेटी पंजाब, भारतीय किसान यूनियन मानसा और आजाद किसान संघर्ष कमेटी की बैठक हुई। बैठक में बलबीर सिंह राजेवाल, प्रेम सिंह भंगू, कंवलप्रीत सिंह पन्नू, भोग सिंह मानसा और हरजिंदर सिंह टांडा के अलावा अन्य संबंधित संघों के अध्यक्षों के साथ-साथ राज्य भर से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। बैठक में विशेष रूप से विभिन्न जेलों में बंद बंदी सिखों की सजा पूरी होने के बाद भी उनकी रिहाई के लिए चंडीगढ़ में जारी मोर्चा के संदर्भ में राज्य में मौजूदा स्थिति की गहन समीक्षा की गई। बैठक में निर्णय किया गया कि बंदी सिख मोर्चा के पक्ष में विशेष रूप से सिख भावनाओं और सामान्य रूप से जन भावनाओं को ध्यान में रखते हुए चंडीगढ़ में गहराते जल संकट के मुद्दों पर समानांतर मोर्चा शुरू करने के लिए राज्य में स्थिति फिलहाल अनुकूल नहीं है।
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गौर हो कि पर्यावरण प्रदूषण और राज्य के संघीय ढांचे की बिगड़ती हालत को लेकर पिछले दिनों यूनियनों ने व्यापक लामबंदी की और लोगों को लंबे संघर्ष के लिए तैयार किया। बैठक में सर्वसम्मति से 3 फरवरी से प्रस्तावित पक्का मोर्चा को निलंबित करने का फैसला किया और केंद्र और राज्य सरकारों से बंदी सिखों की रिहाई और उनकी अन्य मांगों के मुद्दे को तुरंत हल करने को कहा गया।
नेताओं ने कहा कि अगर देश कानून और संविधान के शासन से चलता है तो जेलों में बंद सभी लोग, जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है उन्हें रिहा क्यों नहीं किया जा रहा है। उन्हें अवैध रूप से न्यायिक हिरासत में रखना मानवाधिकारों का उल्लंघन है। बैठक में किसान नेताओं ने कहा कि इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारें समान रूप से जिम्मेदार हैं। बैठक में तय किया गया कि समय आने पर मोर्चा निकालने की तैयारी की जाएगी और एक पखवाड़े के बाद फिर से यूनियनों की बैठक में स्थिति की समीक्षा की जाएगी।
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बैठक में परमजीत सिंह बैदवान, कृपाल सिंह सियाओ, उग्गर सिंह मानसा, बेअंत सिंह महमा सरजा, गुरदेव सिंह वेरपाल, बाबा मोहिंदर सिंह, प्रोफेसर कंवर सिरताज सिंह, नेक सिंह खोक, गुलजार सिंह सलेमपुर, कर्म सिंह करकौर और मलकीत सिंह आदि मौजूद रहे।
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