चंडीगढ़। पीयू के यूआईएलएस की एक छात्रा की ईडब्ल्यूएस छात्रवृत्ति को रोकने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की सिंगल बेंच द्वारा लगाए गए एक लाख रुपये के जुर्माने के आदेश को खंडपीठ ने रद्द कर दिया है।
छात्रा ने 2014-15 में बारहवीं में पूरे शहर में टॉप किया था। इसके बाद उसने पीयू के यूआईएलएस के 5 ईयर लॉ कोर्स में दाखिला लिया था। इस मेधावी छात्रा की आर्थिक तंगी के चलते पीयू ने उसे ईडब्ल्यूएस कोटे से स्कॉलरशिप देनी शुरू की थी लेकिन चौथे वर्ष में छात्रा की यह स्कॉलरशिप बंद कर दी गई और उसे जून 2019 में पत्र लिख बताया गया कि उसका नाम विभाग से काट दिया गया है और उसके नौवें सेमेस्टर की इंटर्नशिप भी रद्द कर दी गई। इसके खिलाफ छात्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि स्वास्थ्य खराब होने के कारण वह एक पेपर नहीं दे पाई थी। उसने अपनी मेडिकल रिपोर्ट भी जमा करवा दी थी। बावजूद इसके उसका नाम काट दिया गया।
सिंगल बेंच ने छात्रा की याचिका को स्वीकार करते हुए पीयू पर एक लाख रुपये जुर्माना लगा दिया था। इसके खिलाफ पीयू ने डबल बेंच में अपील दायर कर बताया था कि छात्रा को पूरा अवसर दिया गया था। छात्रा के साथ अन्य छात्रों एक स्पेशल चांस भी दिया गया था, लेकिन छात्रा ने उसका लाभ नहीं लिया। नियम के अनुसार अगर कोई छात्र किसी विषय में फेल हो जाता है तो उसे छात्रवृत्ति का लाभ नहीं दिया जा सकता।