पंचकूला। लगातार दो घोटालों के बाद नगर निगम अब फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है और कम ब्याज के बावजूद सरकारी बैंकों को ही सुरक्षित मान रहा है। प्राइवेट बैंकों से जुड़े दो बड़े घोटालों में फंसने के बाद पंचकूला नगर निगम अब सतर्क हो गया है। निगम ने पहली बार अपने 80 करोड़ रुपये के फंड को प्राइवेट बैंकों की बजाय सरकारी बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के रूप में जमा कराया है। निगम के इतिहास में यह पहली बार है जब ब्याज से ज्यादा पैसों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। निगम की बाकी एफडी अभी मैच्योर होनी बाकी हैं।
नगर निगम कमिश्नर विनय कुमार बताते हैं कि इन नई एफडी को करवाते समय ब्याज दर, पैसों की सुरक्षा और कई अन्य पहलुओं पर विचार किया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सरकार की गाइडलाइन है कि उपलब्ध फंड को अधिकतम ब्याज पर लगाया जाए। इसी गाइडलाइन का हवाला देकर अब तक निगम का पैसा प्राइवेट बैंकों में जमा किया जाता रहा, क्योंकि प्राइवेट बैंक 8 प्रतिशत से अधिक ब्याज का ऑफर दे रहे थे, जबकि सरकारी बैंक 7 से 7.50 प्रतिशत ब्याज ही दे रहे थे। गाइडलाइन में यह भी साफ लिखा है कि फंड को अधिकतम करना है, लेकिन सरकारी पैसे को जोखिम में डालकर नहीं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए इस बार नगर निगम ने मैच्योर हुए 80 करोड़ रुपये के पूरे फंड को थोड़ा कम ब्याज के बावजूद अलग-अलग सरकारी बैंकों में जमा कराया है।
24 बैंकों से मांगे थे कोटेशन
बैंक धोखाधड़ी के मामलों और राज्य सरकार के निर्देशों के बाद निगम ने इस बार पुराने बैंकों में ही ऑटोमैटिक एफडी रिन्यू कराने की बजाय पैनल में शामिल सभी 24 सरकारी और प्राइवेट बैंकों से एफडी और फ्लेक्सी डिपॉजिट के लिए कोटेशन मांगे थे।
कंपाउंडिंग ब्याज पर निवेश
निगम ने अपना पैसा फ्लेक्सी रेट ऑफ इंटरेस्ट और फिक्स्ड डिपॉजिट रिसिप्ट (कॉलेबल और नॉन-कॉलेबल) के आधार पर कंपाउंडिंग ब्याज पर निवेश करने की योजना बनाई थी। सभी बैंकों को फ्लेक्सी डिपॉजिट अकाउंट में रखे जाने वाले ऑपरेशनल फंड के लिए लागू दरों के साथ-साथ पूरी शर्तें भी बताने को कहा गया था, जिसमें स्वीप-इन/स्वीप-आउट सुविधा, न्यूनतम बैलेंस, लिक्विडिटी की शर्तें और समय से पहले निकासी के नियम शामिल थे।
निगम को दो घोटालों ने हिला दिया
नगर निगम को यह कदम दो बड़े बैंक घोटालों के बाद उठाना पड़ा है, जिनमें निगम के अपने कर्मचारियों और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई थी। पहला मामला आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़ा है। इसमें हरियाणा स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने 593 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी और गबन का केस दर्ज किया था। यह पैसा पंचकूला नगर निगम सहित 18 अलग-अलग सरकारी विभागों और निगमों का था। हालांकि बाद में दावा किया गया कि यह पैसा वापस सरकारी विभागों के खातों में लौटा दिया गया है। दूसरा मामला कोटक महिंद्रा बैंक से जुड़ा है। इसमें नगर निगम के कोटक महिंद्रा बैंक में रखे 16 फिक्स्ड डिपॉजिट में गंभीर अनियमितताएं पाई गई थीं। इन एफडी की कुल राशि 145 करोड़ रुपये से अधिक थी, जिसकी मैच्योरिटी वैल्यू लगभग 158 करोड़ रुपये बनती थी। इस मामले में भी बाद में लगभग पूरी राशि वापस मिलने का दावा किया गया था।