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सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने पीएम की मौजूदगी में कृषि कानूनों को वापस लेने का प्रस्ताव रखा

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चंडीगढ़। सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने सोमवार को राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का प्रस्ताव रखा। साथ ही कहा कि किसान आंदोलन में जान की कुर्बानी देने वाले 194 किसानों के नाम राष्ट्रपति अभिभाषण में शामिल किए जाएं। हालांकि, सत्ता पक्ष ने ध्वनिमत से इसे अस्वीकार कर दिया। राज्यसभा में ज्यों ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना भाषण खत्म करके बैठे तो सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने ये बातें कहीं।
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संसद के बाहर मीडिया से बातचीत में दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि राष्ट्रपति अभिभाषण पर प्रधानमंत्री के वक्तव्य से देश के किसान को केवल निराशा हाथ लगी है। संशोधन प्रस्ताव में उन्होंने कहा कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन के दौरान अपनी जान की कुर्बानी देने वाले से 194 से ज्यादा किसानों के दु:खद निधन पर राष्ट्रपति अभिभाषण में कहीं कोई जिक्र तक नहीं है।
एक और प्रस्ताव में सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि राष्ट्रपति अभिभाषण के पैरा 24 में कहा गया है कि तीन कृषि कानूनों से देश भर में 10 करोड़ से ज्यादा किसानों को तुरंत फायदा मिलने लगा है। जबकि सच्चाई यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कानूनों के क्रियान्वयन पर रोक लगा रखी है। उन्होंने सवाल किया कि जब सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कृषि कानूनों को लागू करने पर स्टे कर रखा है तो राष्ट्रपति अभिभाषण के माध्यम से सरकार यह दावा कैसे कर रही है कि 10 करोड़ से ज्यादा किसानों को लाभ पहुंचना शुरू हो गया है। या तो सरकार कृषि कानून लागू होने पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक को नहीं मान रही या राष्ट्रपति अभिभाषण में गलत तथ्य पेश कर रही है इसलिए इसे अभिभाषण से हटाया जाए।
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