चंडीगढ़ की महिला क्रिकेटर तान्या भाटिया किसी पहचान की मोहताज नहीं। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विकेटकीपर तान्या भाटिया आज जिस मुकाम पर हैं, वह उनकी मां सपना भाटिया की ही देन है।
रविवार को महिला दिवस पर महिला वर्ल्ड कप का फाइनल मुकाबला भारत और आस्ट्रेलिया के बीच खेला जाना है। ऐसे में शहरवासियों की उनसे काफी उम्मीदें हैं। एमसीएमडीएवी कॉलेज-36 में बीए की छात्रा तान्या भाटिया का महिला टीम इंडिया में चयन बतौर विकेटकीपर हुआ है। तान्या विकेट कीपिंग के साथ-साथ बेहद शानदार बल्लेबाज भी हैं।
तान्या ने 7 सात साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया था। डीएवी स्कूल-8 तानिया ने युवराज सिंह के पिता योगराज और सुखविंदर बाबा से पांच साल क्रिकेट के गुर सीखे। इसके बाद जीएनपीएस-36 में क्रिकेट खेलना शुरू किया। इस दौरान तान्या ने कई टूर्नामेंट में शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए खुद को साबित किया। तान्या ने आरपी सिंह और जसवंत राय से क्रिकेट की कोचिंग ली।
कोचिंग के दौरान कई वर्षोें से बेटी तान्या रोजाना अभ्यास के लिए लेकर आने-जाने और उसके बाद पढ़ाई में मदद करना सपना भाटिया की दिनचर्या में शुमार रहा है। कई बार टीम इंडिया की ओर से बेहतर प्रदर्शन न कर पाने पर मां ने हमेशा से तान्या को अगले टूर्नामेंट में बेहतर करने की प्ररेणा दी।
पिता भी रह चुके हैं क्रिकेटर, बेटी पूरा कर रही अधूरा सपना
तान्या भाटिया के पिता संजय भाटिया हरियाणा रणजी टीम के प्लेयर रह चुके हैं। संजय ने बताया कि उन्हें क्रिकेट खेलने का खासा शौक था। वह खुद इंटर कॉलेज, इंटर यूनिवर्सिटी और रणजी टीम में खेल चुके हैं। उन्होंने कहा कि टीम इंडिया के खेलने का सपना था, जो पूरा नहीं हो सका। इसलिए मेरे क्रिकेट के जुनून को तान्या ने अपना जुनून बना लिया। अब वह इंडिया की तरफ से खेल रही है और अच्छा प्रदर्शन कर रही है।