फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Panchkula News: क्षेत्र की समस्याओं से जूझकर मोरनी की सोंठ विदेशोें में बना रही पहचान

विज्ञापन
विज्ञापन
आढ़तियों के माध्यम से मोरनी से दिल्ली, राजस्थान यूपी, पाकिस्तान, दुबई, अफगानिस्तान जैसे देशों में होती है आपूर्ति
विज्ञापन

माई सिटी रिपोर्टर

पंचकूला। मोरनी से दिल्ली, राजस्थान यूपी, पाकिस्तान, दुबई, अफगानिस्तान जैसे देशों में सोंठ की सप्लाई की जाती है, लेकिन इसका सीधा लाभ किसानों को नहीं मिल पाता है। मोरनी में कोल्ड स्टोर नहीं होने के कारण मजबूरन किसानों को आढ़तियों पर निर्भर रहना पड़ता है। किसानों का कहना है कि मोरनी में कोल्ड स्टोर बनाने, आढ़तियों की हिस्सेदारी खत्म करने के साथ अन्य कई समस्याओं का निपटारा हो जाए तो मोरनी वर्ल्ड मैप पर देश में सबसे ज्यादा सोंठ सप्लाई करने वाला कस्बा बन सकता है। छोटे-बड़े हर किसान को पानी का टैंक उपलब्ध कराना अति आवश्यक है। इसके लिए प्रदेश सरकार को माध्यम बनना होगा। आढ़तियों को बीच से हटाने से किसानों को जहां ज्यादा मुनाफा होगा, वहीं समय पर सप्लाई पहुंचने से देश का विदेशों में धमक बढ़ेगी।

दो से ढाई बीघा वालों को मिले पानी का टैंक
किसान बलवंत का कहना है कि मोरनी में पानी की किल्लत है। पानी स्टोर करने के लिए अभी सरकार पांच बीघा जमीन वाले किसानों को पानी का टैंक बनाकर दे रही है। इसका छोटे किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। अगर दो से ढाई बीघा जमीन वाले किसानों को भी छोटा टैंक बनवाकर दिया जाए तो वह सोंठ तैयार करने में बराबरी की भागेदारी पेश करेंगे।
विज्ञापन



बीज तैयार कर किसानों को करता हूं सप्लाई ........

गांव चकोह भोज कोटी के रहने वाले किसान देवेंद्र सिंह ने बताया कि मोरनी के हिल स्टेशन में करीब 60 साल से अदरक की खेती हो रही है। विदेशों और दूसरे राज्यों में डिमांड बढ़ने के बाद अब यहां अदरक से सोंठ तैयार किया जा रहा है। मोरनी के 10 से 15 पंचायतों में करीब एक हजार किसान अदरक से सोंठ तैयार कर रहे हैं। इनमें टिपरा पंचायत के चपलाण, सूग, हरषो, कैनण, धामण, रेवाड़ी, काठी महामल, कोल्यों, बैणी, दारडा, कमारू, खडूणी, बडियाल, थेली व गवाही आदि स्थानों के नाम शामिल हैं। इस बार छह क्विंटल से 30 क्विंटल बीज तैयार कर किसानों को दिया है।

जुलाई में होती है बुआई, जनवरी-फरवरी में होता है तैयार
मोरनी क्षेत्र में अदरक की खेती आषाढ़ मास जुलाई से अगस्त तक शुरू की जाती है। यह छह मास में तैयार हो जाती है। बीज के अदरक का रेट इस बार 14000 रुपये क्विंटल के करीब था। किसान अपने खेत में तैयार बीज लगाते हैं, कई बार वे हिमाचल प्रदेश से भी काफी मात्रा में बीज लाकर बिजाई करते हैं।

कैसे तैयार होती है सोंठ

मनोज कुमार ने बताया कि खेतों में अदरक के पक जाने के बाद किसान उसे घरों में लाकर अच्छी तरह पानी से साफ करते हैं। इसे गोल आकार में काट कर सुखाते हैं। सूखने के बाद इसे मशीन में डाल दिया जाता है। सात बार इस अदरक की मशीन में रगड़ाई होती है। तब कहीं जाकर सोंठ के काबिल गांठ तैयार होती है। इस मशीन से निकालने के बाद 20 किलो अदरक मात्र चार किलो ही रह जाती है। इसके तैयार होने के लिए तेज धूप आवश्यक है, बारिश में इसकी क्वालिटी अच्छी नहीं रहती।
विज्ञापन


फार्मा कंपनियां सोंठ को दवाओं में करती हैं उपयोग
खासतौर से मोरनी की जलवायु अदरक के उत्पादन के लिए एकदम उपयुक्त है। मोरनी की अदरक की सौंठ का प्रयोग फार्मा कंपनियां दवाई बनाने में करती हैं। इसका उपयोग त्रिफला, चूरन, च्यवनप्राश व आयुर्वेदिक दवाइयों में सबसे अधिक होता है। सोंठ विक्रेता किसानों का कहना है कि इसकी पांच किस्मों में अलग-अलग ग्रेडिंग कर पैकिंग की जाती है। ग्रेडिंग के अनुसार ही बाजार में सौंठ का मूल्य प्रति किलो के हिसाब से मिलता है। पाकिस्तान और अन्य देशों की मांग के चलते सौंठ का मूल्य प्रतिवर्ष घटता और बढ़ता रहता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें