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आधे से ज्यादा लोग तो दुखी इसलिए हैं कि उनके पड़ोस वाला बहुत ज्यादा सुखी है : जया किशोरी

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जया किशोरी को सुनने और देखने के लिए हजारों की संख्या में पहुंचे लोग
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। मशहूर कथावाचक व आध्यात्मिक प्रवक्ता जया किशोरी ने कहा कि अपने बच्चों को अध्यात्म से जोड़ें और धर्म से जोड़ें फिर देखिए वह हर काम अच्छे से करेंगे क्योंकि धर्म से जुड़ने का मतलब सब कुछ त्यागना नहीं है। धर्म से जुड़ने का मतलब है-हर कार्य ध्यान रखते हुए करना। धर्म का मतलब पूजा-पाठ नहीं होता बल्कि यह जीने की कला है।
सनातन धर्म से जुड़ा कोई भी शास्त्र आपको पूजा-पाठ नहीं सिखाता, जीना सिखाता है। जब गलत स्थिति आए क्या करना है, विपरीत परिस्थिति आए तो क्या करना है, यही बताया गया है। लेकिन हम इस डर से बच्चों को शास्त्र ही नहीं उठाने देते कि शास्त्र में सब कुछ त्यागने को कहा गया है।
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सेक्टर-5 दशहरा ग्राउंड में श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन कथा को सुनने के लिए हजारों की संख्या में लोग दोपहर दो बजे से ही दशहरा ग्राउंड में पहुंचने शुरु हो गए थे। जय किशोरी को देखने और कथा को सुनने का बच्चों से लेकर बड़ों के बीच काफी उत्साह था। सवा चार बजे जैसे ही जया किशोरी कथा सुनाने के लिए पहुंचीं, पंडाल में बैठे लोग राधे-राधे नाम जपने लगे जिससे पूरे पंडाल गूंज उठा। गोविंद बोलो हरी गोपाल बोलो...भजन के गुणगान के बाद कथा शुरू हुई।
कथा के दौरान जया किशोरी ने बताया कि भक्ति आसान नहीं होती, भजन-कीर्तन कर लेना मात्र भक्ति नहीं है, इसके लिए बहुत प्रयास करना होता है। अगर आपकी संगत अच्छी है, तो सब काम अच्छे होते हैं। जब हम बुरी संगत में पड़ जाते हैं तो भले ही हम कुछ समय उनके जैसे कार्य न करें, लेकिन उसका प्रभाव हमारे ऊपर पड़ जाता है। आप ध्यान दीजिए किसी के साथ यदि आप ज्यादा समय बिताते हैं तो आप उसकी बोली बोलने लग जाते हैं।
कई बार लोग कहते हैं कि उसका प्रभाव मुझ पर पड़ेगा, ऐसा क्यों होगा, मेरा प्रभाव भी तो उस पर पड़ सकता है। लेकिन ध्यान रखें कि बुराई का फैलना आसान है। अच्छाई के फैलने में समय लगता है। अच्छा बनना बहुत मुश्किल है, बुरा बनना बहुत आसान है। किसी को तकलीफ पहुंचाना बहुत आसान है। एक अपशब्द बोलो तो सामने वाला गुस्सा हो सकता है। लेकिन, किसी को खुश करना बहुत मुश्किल है। सबसे मुश्किल तो यह है कि आपके अंदर यह भाव आए कि हम किसी को खुश करना चाहते हैं। हम वही नहीं करना चाहते। आधे से ज्यादा लोग तो दुखी इसलिए हैं कि उनके पड़ोस वाला बहुत ज्यादा सुखी है।

जया किशोरी ने बताया कि झूठ समय के हिसाब से बदलता रहता है, लेकिन सत्य कभी नहीं बदलता, तो ब्रह्मांड में ऐसा कौन है, जो कभी नहीं बदलता वह ईश्वर है। हम और आप जब यहां नहीं थे तब भी ईश्वर थे हम और आप यहां हैं तब भी ईश्वर हैं हम और आप यहां से चले जाएंगे तब भी ईश्वर यहीं विद्यमान रहेंगे। वह कभी भी बदलते नहीं है।
आश्रय हमेशा सत्य का लेना चाहिए क्योंकि सत्य कभी बदलता नहीं। जो बदल जाए, धोखा दे दे उसका आश्रय लेकर क्या फायदा। कई बार लोग कहते हैं कि कि संसार तो दिखता है भगवान तो दिखते ही नहीं। जया किशोरी ने बताया कि सत्य की परिभाषा में यह कहां है कि जो दिखे वह सत्य है और जो ना दिखे वह असत्य। कई बार आंखों देखी बात झूठी साबित हो जाती है। जो बदले नहीं वह सच है। भगवान कभी बदलते नहीं, संसार बदलता है। हर पल-हर क्षण बदलता है।
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