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मानसूत्र सत्र ः सत्ता पक्ष से दो गुणा अधिक समय विपक्षी विधायकों को मिला

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चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा के इतिहास में पहली बार शुरू हुए शून्यकाल और विधेयकों पर चर्चा के लिए सत्ताधारी विधायकों से दोगुना अधिक समय विपक्षी दल के विधायकों को मिला। इस दौरान सत्ता पक्ष को 107 मिनट, विपक्ष को 217 मिनट और निर्दलीय विधायकों को 22 मिनट का समय दिया। मानसून सत्र की तीनों बैठकों में शून्यकाल के दौरान 42 विधायकों ने अपनी बात रखी। इनमें से कांग्रेस के 18, भाजपा के 12, जजपा के 6 और 6 निर्दलीय विधायकों को बोलने का मौका मिला। सदन में पारित 11 विधेयकों पर आयोजित विस्तृत चर्चा में 42 विधायकों ने भाग लिया।
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विधानसभा सचिवालय में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने विधानसभा के पिछले 16 सालों के आंकड़े पेश किए। गुप्ता ने कहा कि मानसून सत्र के लिए विधानसभा सचिवालय को 247 तारांकित और 120 अतारांकित प्रश्न प्राप्त हुए थे। इनमें से 60 तारांकित और 56 अतारांकित प्रश्न कार्यवाही का हिस्सा बने। इसी प्रकार 5 ध्यानाकर्षण प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा हुई। विधान सभा सचिवालय को 5 स्थगन प्रस्ताव भी प्राप्त हुए थे, जिनमें से 2 को ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में परिवर्तित कर दिया गया, जबकि 3 विधायी कारणों से अस्वीकृत करने पड़े।
कांग्रेस के समय विपक्षी को बोलने का इतना मौका नहीं मिला
समयावधि बढ़ाने संबंधी विपक्ष के सवाल पर गुप्ता ने कहा कि अच्छा होता कि कांग्रेस के नेता अपने कार्यकाल में स्वस्थ परंपराओं की शुरुआत करते। आंकड़े गवाह हैं कि कांग्रेस के शासनकाल में विधानसभा के न तो इतने लंबे सत्र चले और जो औपचारिकता भर चलते थे। उनमें विपक्षी विधायकों को बोलने का इस प्रकार अवसर नहीं दिया जाता था, जैसे अब मिल रहा है।
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कांग्रेस कार्यकाल के आंकड़े
कांग्रेस के पहले कार्यकाल में 2005 से 2009 तक 12 सत्र हुए थे, जिनमें मात्र 70 बैठकैं हुई थीं। कांग्रेस के अगले कार्यकाल में सत्र और सीटिंग दोनों घटाए गए और वर्ष 2009 से 2014 तक 11 विधानसभा सत्रों में मात्र 56 बैठकें हुई थीं।
2014 से बढ़ी बैठकें
वर्ष 2014 से विधानसभा के सत्र और बैठकें दोनों बढ़ने शुरू हुईं। 2014 से 2019 तक 13वीं विधानसभा में 15 सत्रों का आयोजन हुआ था, जिनमें 84 सीटिंग रही थीं। नवंबर 2019 में गठित 14वीं विधान सभा के अब तक के 6 सत्रों में कुल 31 बैठकें हुई हैं। 20 अगस्त से शुरू हुए मानसून सत्र के दौरान तीन बैठकों में 15 घंटे 34 मिनट कार्यवाही चली।
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