चंडीगढ़ में वीवीआईपी कल्चर पर लगाम लगाने और पंजाब के सरकारी खजाने पर बोझ घटाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने मंत्रियों, विधायकों और अफसरों को महंगे व आलीशान होटलों में ठहरने के बजाय प्रदेश सरकार के सर्किट हाउसों और अन्य सरकारी गेस्ट हाउसों में ठहरने की ताकीद की है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री के साथ-साथ राज्य के मंत्रियों पर वीवीआईपी कल्चर का अनुसरण करने के आरोप लगे थे। विपक्षी दलों ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाए थे कि आम आदमी की पार्टी होने का दम भरने वाले नेता अब महंगी गाड़ियों में घूमते हैं। वे आलीशान मकानों में आराम फरमा रहे हैं और भारी सुरक्षा बल व लाव-लश्कर के साथ राज्य के वीवीआईपी बन गए हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने आदेश में कहा है कि इससे जहां वीवीआईपी कल्चर पर रोक लगेगी, वहीं सरकारी खजाने पर बोझ भी कम होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सर्किट हाउस और दूसरे सरकारी गेस्ट हाउस, मंत्रियों व अफसरों के ठहरने के लिए ही बने हैं। फिर भी मंत्री, विधायक और अफसर आमतौर पर महंगे व आलीशान होटलों में ठहरते हैं, जिसका सारा खर्च सरकारी खजाने पर आता है। मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि अब जो भी मंत्री, विधायक या अधिकारी फील्ड में जाएंगे उन्हें संबंधित इलाके के सर्किट हाउस या सरकारी गेस्ट हाउस में ही ठहरना होगा।
सीएमओ ने सर्किट हाउसों की सूची मंगाई
मुख्यमंत्री कार्यालय ने सामान्य प्रशासन विभाग से प्रदेश के सर्किट हाउसों और सरकारी गेस्ट हाउसों की सूची उपलब्ध कराने को कहा है। वर्तमान में राज्य सरकार के नई दिल्ली और शिमला समेत पंजाब में कुल 10 सर्किट हाउस- अमृतसर, बठिंडा, चंडीगढ़, फरीदकोट, फिरोजपुर, जालंधर, लुधियाना, पटियाला में हैं। इसके अलावा पंजाब में वन विभाग, पीडब्ल्यूडी, बिजली विभाग, सिंचाई विभाग समेत कई अन्य विभागों के गेस्ट हाउस हैं।
गौरतलब है कि राज्य के सर्किट हाउस व गेस्ट हाउसों में पिछली सरकारों के समय तक अधिकारियों के अलावा आम लोगों को ऑनलाइन बुकिंग के जरिये ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराई जाती थी लेकिन कैप्टन सरकार ने प्रदेश की खराब वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए सर्किट हाउसों को निजी क्षेत्र में देने का फैसला लिया था।